सांसद-विधायक का हब रहा मुजफ्फरपुर का रसूलपुर जिलानी

सांसद-विधायक का हब रहा मुजफ्फरपुर का रसूलपुर जिलानी

शहर का रसूलपुर जिलानी मोहल्ला सांसद-विधायक का हब रहा है। यहां से चलने वाली सियासी हवाएं सूबे में दशकों तक सत्ता का रुख तय करती थीं। जो भी यहां बसने आए, उन्हें सियासत की ऐसी गंध लगी कि चुनावी जंग में कूदते चले गए। यहां से एक दर्जन से भी अधिक राजनेता संसद और बिहार विधानसभा में पहुंचे।
मुजफ्फरपुर में चक्कर मैदान के किनारे और मझौलिया रोड से पश्चिम बसे इस मोहल्ले की कोठियों में कांग्रेसी, समाजवादी, जनसंघी व कम्युनिश्ट नेताओं के ठहाके गूंजते थे। कई ऐसे परिवार हैं, जिनमें पती-पत्नी और बाप-बेटा व आगे चलकर बहू भी विधायक बनीं। डॉ. जगन्नाथ मिश्रा बिहार के मुख्यमंत्री बने। श्यामनंद मिश्र भारत के विदेश मंत्री बने। स्वतंत्रता सेनानी ललितेश्वर प्रसाद शाही और आरडीएस कॉलेज के प्रो. रामकृपाल सिन्हा केन्द्रीय मंत्री बने। गन्नीपुर में अपना मकान बनाने से पहले वे भी यहां किरायेदार थे। उनकी पत्नी मृदुला सिन्हा हाल तक गोवा की राज्यपाल रही हैं। हिन्द केसरी यादव, डॉ. महाचंद्र प्रसाद सिंह और वीणा शाही राज्य सरकार में मंत्री बनीं। समाजवादी दिग्गज बसावन सिंह के पुत्र प्रो. अरुण कुामर सिंह 1977 में लालगंज से विधायक बने। सांसद और राष्ट्रकवि बनने से पहले जब रामधारी सिंह दिनकर लंगट सिंह कॉलेज में प्राध्यमक थे, वे मझौलिया रोड में कम्युनिस्ट नेता मो. जुनूस के घर के बगल में बारी-बारी से दो मकानों में किरायेदार रहे।
 दरभंगा महाराज को हराया
देश की आजादी के बाद पहले लोकसभा चुनाव 1952 में दरभंगा उत्तरी सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार श्यामनंदन मिश्र ने दरभंगा महाराज कामेश्वर सिंह को हरा दिया था। पिपरा नेपाल के मूल निवासी श्यामनंदन मिश्र की मधुबनी के उमगांव में जमींदारी थी। वे 1957 में जयनगर से तथा 1971 एवं 77 में बेगूसराय से सांसद निर्वाचित हुए। कांग्रेस विभाजन के बाद वे राज्यसभा में संगठन कांग्रेस के नेता थे। अटल बिहारी वाजपेयी के बाद और पीवी नरसिंहा राव से पहले चौधरी चरण सिंह सरकार में विदेश मंत्री रहे। चक्कर मैदान स्थित आवास उनका आजीवन स्थायी पता रहा।

कोर्ट से विधानसभा तक
स्वतंत्रता सेनानी एल.पी. शाही पुराने मुजफ्फरपुर जिला के लालगंज से 1952 का चुनाव जीते। वे मुजफ्फरपुर में मॉर्निंग कोर्ट में वकालत करते थे और विधानसभा के सत्र में शामिल होने के लिए साइकिल से चक्कर मैदान पहुंचकर विमान में बैठते थे। मुजफ्फरपुर से पटना का विमान भाड़ा 15 रुपये था। शाम में स्टीमर से गंगा पार कर सुबह फिर कोर्ट पहुंचते थे। लालगंज व वैशाली से जीतकर वर्षों तक बिहार सरकार में मंत्री रहे। 1984 में मुजफ्फरपुर से सांसद निर्वाचित हुए। उनके पुत्र हेमंत शाही व बहू वीणा शाही भी वैशाली से विधायक बनीं।

शिक्षाविदों की जमघट
एल.एस. कॉलेज के पास स्थित इस मोहल्ले में कई प्रोफेसरों ने आशियाना बनाया। अर्थशास्त्र के प्रो. महंथ श्यामसुंदर दास यहां 1948 में बसे। वे 1977 में सीतामढ़ी से सांसद बने। प्रख्यात साहित्यकार एवं सोशलिस्ट विधायक रामबृक्ष बेनीपुरी उनके ससुर थे और मुजफ्फरपुर प्रवास के दौरान दामाद के आवास पर समाजवादियों की जमघट लगती थी। अर्थशास्त्र के प्रो. डॉ. जगन्नाथ मिश्रा भी शुरू में रसूलपुर जिलानी में ही किरायेदार रहे। प्रो. मिथिलेश पाण्डेय और उनकी पत्नी वीणावादिनी पाण्डेय मधुबनी के हरलाखी से विधायक बनीं।

कांग्रेसी-समाजवादी का गढ़, मुहाने पर लेनिन चौक
भटौना के योगेंद्र शर्मा आजादी से पहले प्रोविंसियल एसेंबली के सदस्य निर्वाचित हुए थे। कांग्रेस विधायक एलपी शाही, सुदामा चौधरी एवं उनके पति भूवनेश्वर चौधरी तथा त्रिवेनी प्रसाद सिंह के घर की चहारदीवारी एक-दूसरे को छूती थी। कुछ ही दूरी पर प्रो. श्याम सुंदर दास का आवास इमरजेंसी में जेपी आंदोलन का केंन्द्र रहा। कांग्रेस व समाजदवादियों के इस गढ़ के मुहाने पर लेनिन चौक मशहूर है। इस नामकरण में कम्युनिस्ट नेता मो. युनूस और डॉ.राम शोभा सिंह समेत कई वामपंथियों की अहम भूमिका रही। राजनीति की अलग-अलग धाराओं से व्यक्तिगत रिश्ते में कभी खटास नहीं आया।