Home झारखंड सरकार को है पारा शिक्षकों की चिता : हेमंत सोरेन

सरकार को है पारा शिक्षकों की चिता : हेमंत सोरेन

रांची : मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा है कि राज्य सरकार को पारा शिक्षकों की चिता है। उनकी सभी समस्याएं दूर की जाएंगी। उन्हें सेवानिवृत्ति लाभ, चिकित्सा सुविधा, ब्याज रहित लोन आदि सभी सुविधाओं पर शीघ्र निर्णय लिया जाएगा। मुख्यमंत्री सोमवार को प्रोजेक्ट भवन में पारा शिक्षकों, बीआरपी-सीआरपी तथा कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों के शिक्षकों व कर्मियों के कल्याण कोष को लेकर आमसभा की बैठक को संबोधित कर रहे थे। इससे पहले, आमसभा की इस पहली बैठक में झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद द्वारा तैयार प्रस्ताव रखा गया। इसपर पारा शिक्षकों तथा प्रखंड संसाधन सेवियों (बीआरपी) व संकुल संसाधन सेवियों (सीआरपी) ने कुछ संशोधन करने की मांग उठाई। मुख्यमंत्री ने सारी बातें नोट करने के बाद इनकी मांगों पर विचार करने के लिए प्रस्ताव में शामिल करने के निर्देश देते हुए शीघ्र ही अगली बैठक बुलाकर निर्णय लेने की बात कही। मुख्यमंत्री ने पारा शिक्षकों के स्थायीकरण तथा वेतनमान पर निर्णय लेने के लिए भी शीघ्र बैठक बुलाने का आश्वासन दिया।

बैठक में पारा शिक्षकों ने मृत्यु व सेवानिवृत्ति की स्थिति में न्यूनतम पांच लाख एवं इसमें प्रतिवर्ष 10 फीसद की वृद्धि की मांग की। साथ ही, बेटे एवं बेटियों की उच्च शिक्षा तथा बेटी की शादी के लिए न्यूनतम तीन लाख रुपये ब्याज रहित ऋण, ईपीएफ (कर्मचारी भविष्य निधि) से जोड़ने तथा सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन की मांग रखी। बैठक में मुख्य सचिव सुखदेव सिंह, विकास आयुक्त केके खंडेलवाल, शिक्षा सचिव राहुल शर्मा, वित्त सचिव हिमानी पांडेय, राज्य परियोजना निदेशक शैलेश कुमार चौरसिया, एकीकृत पारा शिक्षक संघर्ष मोर्चा के बिनोद बिहारी महतो, संजय कुमार दुबे, हृषिकेश पाठक, बीआरपी-सीआरपी महासंघ के पंकज शुक्ला, अमर खत्री आदि शामिल हुए।

मुत्यु पर पांच लाख के लिए जीवन बीमा का प्रस्ताव :

झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद ने पारा शिक्षकों एवं अन्य की सेवाकाल के दौरान मृत्यु होने पर आश्रितों को पांच लाख रुपये की सहायता राशि देने के लिए भारतीय जीवन बीमा निगम से एक लाख रुपये का बीमा तथा दुर्घटना बीमा के लिए ग्रुप इंश्योरेंस का प्रस्ताव रखा था। बीआरपी-सीआरपी ने इसका विरोध करते हुए कल्याण कोष से राशि देने की मांग रखी। प्रस्ताव में पूर्ण दिव्यांगता पर तीन लाख व आंशिक दिव्यांगता पर दो लाख रुपये की सहायता राशि देने की बात कही गई थी। इसे पांच लाख रुपये करने की मांग उठी।


10 करोड़ के बजाए 100 करोड़ फंड दे सरकार :

बैठक में बीआरपी-सीआरपी संघ ने भी सेवानवृत्ति के बाद एकमुश्त पांच लाख रुपये, कार्यकाल के दौरान मृत्यु अथवा विकलांग होने पर आश्रितों को पांच लाख रुपये की मांग रखी। साथ ही, कल्याण कोष में राज्य सरकार की ओर से 10 करोड़ के बजाए 100 करोड़ रुपये एकमुश्त फंड देने की मांग की गई।

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