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शराब पीकर रोड एक्सीडेंट करने वालों में यह राज्य है पहले नंबर पर

नई दिल्ली. शराब (Liquor) या किसी भी तरह का नशा करके वाहन न चलाएं, यह खतरनाक हो सकता है सिर्फ यह समझाने के लिए सरकार जागरुकता अभियान पर करोड़ों रुपये खर्च कर देती है. हालांकि ऐसा करने पर सजा और जुर्माना (Penalty) दोनों तरह की कार्रवाई भी की जाती है. लेकिन इसके बाद भी लोग हैं कि मानने को तैयार ही नहीं हैं. हर साल 14 हज़ार से ज़्यादा रोड एक्सीडेंट (Road Accident) सिर्फ लिए हो जाते हैं कि वाहन चलाते वक्त शराब पी होती है.

हालांकि राहत वाली खबर यह है कि जिन मैट्रोपोलिन सिटी में वाहनों की संख्या सबसे ज़्यादा है, वहां इस तरह के रोड एक्सीडेंट की संख्या न के बराबर है. दूसरी ओर देश में हर साल नशा कर गाड़ी चलाने (Drunken Drive) वालों की वजह से होने वाले एक्सीडेंट का नंबर 12 हज़ार से लेकर 14 हज़ार तक है.

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पहले नंबर पर यूपी तो उसके बाद ओडिसा और आंध्रा प्रदेश हैंशराब या दूसरा नशा करके वाहन चलाते वक्त एक्सीडेंट करने वालों में बीते तीन साल से यूपी के लोग पहले नंबर पर हैं. तीन साल से लगातार यूपी में यह आंकड़ा तीन हज़ार से ऊपर जा रहा है. 2019 में तो यह आंकड़ा साढ़े हज़ार के करीब पहुंच गया था. अकेले तीन साल में ही यूपी में इस तरह से 11.5 हज़ार से अधिक एक्सीडेंट हो चुके हैं. अगर ओडिशा की बात करें तो वहां पिछले तीन साल में करीब 4 हज़ार एक्सीडेंट सिर्फ शराब पीकर गाड़ी चलाने से हुए हैं. आंध्रा प्रदेश में एक्सीडेंट का यह आंकड़ा 2500 के लगभग है.

शराब पीकर गाड़ी चलाने वालों से होने वाले एक्सीडेंट का यह है आंकड़ा.

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चौंक जाएंगे दिल्ली-महाराष्ट्रा के आंकड़े सुनकर

मेट्रो सिटी की बात करें तो ज़हन में तेजी के साथ दिल्ली और मुम्बई की सड़कें घूमने लगती हैं. सड़कों पर बेहताशा दौड़ती गाड़ियां दिखाई देने लगती हैं. लेकिन ताज्जुब की बात यह है कि शराब पीकर गाड़ी चलाने और रोड़ एक्सीडेंट करने वालों में दिल्ली और महाराष्ट्रा का नंबर बहुत पीछे है.

दिल्ली की बात करें तो तीन साल में सिर्फ 675 के लगभग शराब पीकर रोड एक्सीडेंट करने के केस सामने आए हैं. वहीं महाराष्ट्रा में यह आंकड़ा 1350 के आसपास है. जबकि इन शहरों में वाहनों की संख्या देखकर हमे लगता है कि यहां पर इस तरह के केस ज़्यादा होते होंगे. लेकिन हकीकत यह नहीं है.

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