Home बिहार वैशाली में दिया था रघुवंश बाबू ने अंतिम भाषण, उठ जाग मुसाफिर...

वैशाली में दिया था रघुवंश बाबू ने अंतिम भाषण, उठ जाग मुसाफिर भोर भई, अब रैन कहां जो सोवत है…

उठ जाग मुसाफिर भोर भई, अब रैन कहां जो सोवत है। जो सोवत है सो खोवत है, जो जागत है सो पावत है। रघुवंश बाबू का वैशाली गढ पर दिया गया यह अंतिम भाषण आज भी वैशाली वासियों के दिलो दिमाग पर छाया हुआ है। वर्ष 2019 में लोकसभा चुनाव हारने के बाद 26 जनवरी 2020 को वैशाली झंडातोलन कार्यक्रम में पहुंचे पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ रघुवंश प्रसाद सिंह ने इन्हीं लाइनों से कार्यकर्ताओं के मनोबल ऊपर उठाने का काम किया था।

जदयू से प्रशांत किशोर के अलग हो जाने का आंकलन उनके द्वारा उसी समय लगा लिया गया था। डॉ रघुवंश प्रसाद सिंह ने झंडातोलन के अवसर पर भाषण देते हुए कहा था कि पवन वर्मा और प्रशांत किशोर जदयू पार्टी में बस कुछ दिनों के मेहमान हैं। उनके द्वारा तब तक वैशाली गढ पर झंडोत्तोलन कराने की बात कही गई थी, जब तक वैशाली गढ़ पर माननीय राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री द्वारा राष्ट्रीय ध्वज नहीं फहराया जाए। इसके लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा अपनी सहमति भी देने की बात रघुवंश बाबू ने कही थी। 

वैशाली में 26 जनवरी और 15 अगस्त को झंडातोलन करने के लिए बिहार सरकार को हमेशा वे पत्र लिखा करते थे। वैशाली में स्वतंत्रता दिवस एवं गणतंत्र दिवस के अवसर पर झंडातोलन कराने के मांग को लेकर हमेशा उन्होंने अपनी आवाज बुलंद की। यहां झंडातोलन कराने को लेकर पांच दलित महिलाओं के माध्यम से वैशालीगढ पर झंडोत्तोलन की उन्होंने शुरूआत कराई। करीब दो दशक से रघुवंश बाबू के नेतृत्व में यहां झंडोत्तोलन का कार्य शुरू कराया गया था। 

विधानसभा और लोकसभा चुनाव के दौरान भी अपने भाषण में कभी भी विरोधियों के प्रति अमर्यादित भाषा का प्रयोग डॉ रघुवंश प्रसाद सिंह ने नहीं किया। कार्यकर्ताओं को हमेशा संयम में रहकर चुनाव प्रचार करने का वे निर्देश देते रहते थे। जब कभी वे क्षेत्र में प्रचार-प्रसार के लिए जाते थे तो अपने ठेठ गंवई अंदाज को नहीं भूल पाते थे।

Most Popular