रेलवे स्कूल में नहीं पढ़ते रेलकर्मियों के बच्चे, जान के रह जाएंगे हैरान

रेलवे स्कूल में नहीं पढ़ते रेलकर्मियों के बच्चे, जान के रह जाएंगे हैरान

दक्षिण पूर्व रेलवे की ओर से चक्रधरपुर रेल मंडल के विभिन्न रेलवे कॉलोनियों में संचालित होने वाले स्कूलों का अस्तित्व खतरे में है। रेल कर्मचारियों के बच्चों को पढ़ने के लिए रेल स्कूल का संचालित किया जाता है, लेकिन इन स्कूलों में रेल कर्मचारियों के बच्चे नहीं पढ़ते हैं। 

रेल स्कूल संचालित करने का मानक तय किया गया है कि जिन स्कूल में कम से कम 25 रेल कर्मचारियों के बच्चे होने चाहिए, लेकिन किसी भी स्कूल में रेल कर्मचारियों के 25 बच्चों ने दाखिला नहीं लिया है। लगभग 90 प्रतिशत बाहरी बच्चे पढ़ते हैं। चक्रधरपुर, टाटानगर, सिनी, बंडामुंडा और झारसुगोड़ा में लगभग सात स्कूलों का संचालन रेलवे कार्मिक विभाग करता है, ताकि रेल कर्मचारियों के बच्चों को पढ़ाई में कोई समस्या न हो। टाटानगर में रेलवे मिश्रित उच्च विद्यालय में केवल 11 बच्चे रेल कर्मचारियों के पढ़ते हैं। पिछले दिनों रेलवे कार्मिक विभाग की तरफ से रेल कर्मचारियों से अपील की गई कि कम से कम 25 बच्चों का जरूर कराए, ताकि स्कूल चलाने का उद्देश्य सफल हो। टाटानगर रेलवे मिश्रित उच्च विद्यालय में हिन्दी, बांग्ला, तेलगू, उड़िया सहित अन्य भाषाओं में पढ़ाने की सुविधा हैं, जबकि चक्रधरपुर में हिन्दी और अंग्रेजी माध्यम से दो स्कूलों का संचालन होता है। दक्षिण पूर्व रेलवे मेंस कांग्रेस के मंडल संयोजक शशि मिश्रा कहते हैं कि एक रेल कर्मचारियों को एक बच्चे की पढ़ाई के लिए कम से कम 27 हजार रुपये एलाउंस मिलता है तो वे शहर के बेहतर स्कूल में पढ़ाना पसंद करते हैं। रेलवे स्कूलों में पढाई की गुणवत्ता सुधारने की जरूरत है। डीआरएम ने पढ़ाई की गुणवत्ता को सुधारने का आश्वासन दिया है। उम्मीद है कि कोरोना काल के बाद स्कूलों की समीक्षा की जाएगी।