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राहत : झारखंड के संगीत शिक्षकों के लिए खुशखबरी, आप भी जानें क्या आया फैसला

प्रयाग संगीत समिति की डिग्री पर राज्य सरकार के स्कूलों में पढ़ा रहे संगीत शिक्षकों की नौकरी अब रद्द नहीं होगी। विधानसभा की समिति ने इस पर रोक लगाने की सिफारिश की है। इस बारे में राज्य सरकार के फैसले को नकार दिया है। संगीत शिक्षकों की बची हुई नियुक्ति में प्रयाग संगीत समिति के डिग्री धारकों की नौकरी पर लगी रोक भी हटाने के लिए कहा गया है। प्राचीन कला केंद्र चंडीगढ़ की डिग्रियों के बारे में भी ऐसी ही अनुशंसा की है।

विधानसभा की अनागत प्रश्न समिति ने 11 सितंबर को स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग को पत्र भेजकर प्रयाग संगीत समिति और प्राचीन कला केंद्र चंडीगढ़ की संगीत की डिग्रियों को अवैध करार देने के फैसले को खारिज कर दिया है। समिति की अनुशंसा में कहा गया है कि अलग-अलग राज्यों के हाईकोर्ट के फैसले में दोनों संस्थाओं की डिग्री को मान्यता दी गई है। इसी तरह दूसरे प्रदेशों की राज्य सरकारें भी इन दोनों संस्थाओं के स्नातक और स्नातकोत्तर विद्यार्थियों को अपने प्रदेशों में नियुक्त करती है। 1960 से ही दोनों संस्थाओं से पढ़ाई कर चुके लोगों को संगीत शिक्षक के तौर पर नियुक्ति की जा रही है। झारखंड सरकार के शैक्षिक संस्थानों में ऐसे हजारों लोग नियुक्त हैं। किसी भी आधार पर दोनों संस्थानों की डिग्री को अवैध करार देना गलत है। आगे भी दोनों संस्थानों से उत्तीर्ण लोगों की नियुक्ति वाजिब है।

पांच हजार शिक्षकों को मिली राहत : विधानसभा की अनागत प्रश्न समिति की सिफारिश से राज्य सरकार के विद्यालयों, महाविद्यालयों और कल्याण विभाग के विद्यालयों में कार्यरत लगभग पांच हजार शिक्षकों को राहत मिल गई है। ये लोग विभिन्न मध्य विद्यालय़ों, उच्च विद्यालयों, इंटर क़ॉलेजों, सरकारी प्लस टू विद्यालयों, अल्पसंख्यक विद्यालय़ों, बुनियादी विद्यालयों, महिला विद्यालयों और महाविद्यालयों, परियोजना उच्च विद्यालयों, सरकारी सहायता प्राप्त उच्च विद्यालयों तथा संबद्ध डिग्री महाविद्यालयों में कार्यरत हैं। स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की ओर से दोनों संस्थानों की डिग्री अवैध करार देने से इनकी नौकरी पर तलवार लटक गई है।

दर्जन भर हो चुके हैं बर्खास्त  : माध्यमिक शिक्षा निदेशालय की ओर से संगीत की डिग्री के बारे में दिशा-निर्देश जारी करने के बाद गोड्डा जिले के दर्जन भर संगीत शिक्षकों की डिग्री अवैध मानकर उन्हें बर्खास्त कर दिया गया। हाल ही में इनकी नियुक्ति हुई थी। इसके बाद कतिपय कारणों से दुमका और गोड्डा के अलावा बाकी जिलों में हाई स्कूल शिक्षकों की नियुक्ति पर रोक लग गई। आगे होने वाले नियुक्तियों में प्रयाग संगीत समिति और प्राचीन कला केंद्र चंडीगढ़ के स्नातकों की निय़ुक्ति पर रोक लगनी थी।

माध्यमिक शिक्षा निदेशालय के पत्र से बरपा हंगामा : पिछले दिनों हाईस्कूल शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान दुमका और गोड्डा के जिला शिक्षा पदाधिकारियों ने प्रयाग संगीत समिति और प्राचीन कला केंद्र चंडीगढ़ से उत्तीर्ण संगीत डिग्रीधारियों के बारे में मार्गदर्शन मांगा। माध्यमिक शिक्षा निदेशालय की ओर से कहा गया कि निय़ुक्ति नियमावली में केवल मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालयों की डिग्री पर ही विचार होना है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के मान्यता प्राप्त संस्थानों की सूची में उक्त दोनों संस्थान नहीं हैं। इसलिए उनकी डिग्री को वैध नहीं माना जाएगा। निदेशालय के पत्र जारी करते ही लगभग दर्जन भर शिक्षकों को बर्खास्त कर दिया गया। बाकी को नोटिस दिया गया है। निदेशालय के इस पत्र से सालों से काम कर रहे हजारों शिक्षकों की नियुक्ति के अवैध हो जाने का भी खतरा पैदा हो गय़ा। पोड़ेयाहाट के विधायक प्रदीप य़ादव ने विधानसभा में आवेदन देकर यह सवाल पूछा। कोरोना के कारण मार्च में सदन के समय से पहले स्थगित हो जाने के कारण विधानसभा में सरकार की ओर से इसका जवाब नहीं आ सका। पिछले दिनों विधानसभा की अनागत प्रश्न समिति ने स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग से इसका जवाब तलब किया। विभाग के जवाब से असंतुष्ट होकर समिति ने सभी पहलुओं की समीक्षा की। दोनों संस्थानों की डिग्री को मान्य करार दिया।

आगे सरकार को क्या करना होगा
माध्यमिक शिक्षकों की नियुक्ति नियमावली में संशोधन करना होगा।
समकक्षता समिति की बैठक बुलाकर दोनों संस्थानों की डिग्री को मान्यता देनी होगी।

कहां के कितने सरकारी शिक्षक 
प्रयाग संगीत समिति
3500
प्राचीन कला केंद्र
1000

अनागत प्रश्न समिति सभापति रामचंद्र चंद्रवंशी ने कहा कि प्रयाग संगीत समिति और प्राचीन कला केंद्र की डिग्री वैध है। इसे अवैध करार देना गलत है। अनागत प्रश्न समिति ने अनुशंसा राज्य सरकार को भेज दी है।

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