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रानीगंज विधानसभा सीट: चुनाव में कई दिग्गजों की जीत का गवाह रहा है अररिया जिले का यह क्षेत्र

पिछड़े क्षेत्र में शुमार रानीगंज विधानसभा का गठन 1957 में हुआ था। 1962 के बाद यह सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित  हो गयी। यहां दलित वोटरों की भूमिका निर्णायक रही है। रानीगंज विधानसभा क्षेत्र में अबतक 15 चुनाव हुए है। इसमें कांग्रेस ने पांच बार, बीजेपी ने तीन बार, जनता दल ने दो बार, जनता पार्टी, आरजेडी व जदयू ने एक-एक बार जीत हासिल की है। इसके अलावा दो बार निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी बाजी मारी है।

डूमर लाल बैठा, जमुना प्रसाद राम, शांति देवी जैसे दिग्गज इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। ये तीनों मंत्री भी रह चुके हैं। रानीगंज विस क्षेत्र को मूंगफली की खेती से नई पहचान मिली है। वहीं क्षेत्र की कई पंचायतों के किसान सब्जी की खेती कर अच्छी आमदनी होती है। इसके अलावा धान, व मक्के की खूब पैदावार होती है। रानीगंज विधानसभा क्षेत्र की राजनीति मूल रूप से मुस्लिम, यादव और दलित वोटरों के ईदगिर्द घूमती है। 2009 के परिसीमन के बाद  रानीगंज विस में रानीगंज प्रखंड की 32 व भरगामा प्रखंड की सात पंचायतों को शामिल किया गया है।

रानीगंज विधानसभा क्षेत्र अति पिछड़ा है। यहां एक भी उद्योग है। इस कारण हर साल हजारों मजदूर रोजी-रोटी की तलाश में बाहर जाने को मजबूर हैं। रानीगंज विधानसभा क्षेत्र का अधिकतर इलाका बाढ़ग्रस्त रहता है। क्षेत्र की फरियानी, बिलेनिया, दुलरदेयी  आदि नदियों से एक दर्जन से अधिक पंचायतें हर साल बाढ़ प्रभावित होती हैं।

शिक्षा की समुचित व्यवस्था नहीं
शिक्षा की बात करें तो क्षेत्र में दो डिग्री और एक इंटरमीडिएट कॉलेज हैं। हालांकि ये क्षेत्र की जरूरतों को पूरा नहीं कर पा रहे हैं। मजबूरी में बच्चे पढ़ाई के लिए बाहर को विवश होते हैं। स्वास्थ्य सेवाएं भी बहुत अच्छी नहीं हैं। मंडी नहीं होने के कारण किसान औने पौने दामों पर अपनी फसल बेचने को मजबूर हैं।

वृक्ष वाटिका ने राज्य स्तर पर रानीगंज को दिलाई पहचान
रानीगंज विधानसभा क्षेत्र की खास पहचान हसनपुर पंचायत में बनी वृक्ष वाटिका है। सरकार ने तो अब इसे चिड़ियाघर के रूप में विकसित करने की घोषणा की है। करीब तीन सौ एकड़ में फैली इस वाटिका ने क्षेत्र में अपनी खास पहचान बनायी है। इसमें वर्तमान में आधा दर्जन से अधिक हिरण व दो दर्जन से अधिक अजगर समेत कई जंगली जानवर व अलग-अलग प्रजातियों के वन्य जीव हैं। विधानसभा क्षेत्र की बसेटी पंचायत में महारानी इंद्रावती के समय बनाया गया ढाई सौ साल पुराना शिव मंदिर व पहुंसरा में महारानी इंद्रावती का किला अपनी ऐतिहासिक विरासत संजोए हुए हैं।

रानीगंज विस/आंकड़े:
कुल मतदाता 273431
पुरुष मतदाता 143958
महिला मतदाता 129473
40 साल से कम उम्र के मतदाता: 65 हजार  
 कुल पंचायत 39

अब तक चुने गये-
1957 रामनारायण मंडल (कांग्रेस)  
1962 गणेश लाल वर्मा (निर्दलीय)  
 1967 डूमर लाल बैठा (कांग्रेस)
1969 डूमर लाल बैठा (कांग्रेस)    
1972   बुन्देल पासवान (निर्दलीय)
1977 अधिकलाल पासवान (जेएनपी)
1980 यमुना प्रसाद राम (कांग्रेस)
1985 यमुना प्रसाद राम (कांग्रेस)
 1990 शांति देवी (जद)
1995 शांति देवी (जद)
2000 यमुना प्रसाद राम (राजद)
2005 फरवरी- परमानंद ऋषिदेव (भाजपा)
2005 नवंबर- रामजी दास ऋषिदेव (भाजपा)
2010 परमानंद ऋषिदेव (भाजपा)
2015 अचमित ऋषिदेव (जदयू)
 

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