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राजधानी का भव्य इस्कॉन मंदिर का हुआ लोकार्पण,आध्यात्मिक चेतना के संचार में प्रमुख भूमिका निभाएगा यह मंदिर

राजधानी पटना में तैयार हो रहे हैं 100 करोड़ से अधिक की लागत से इस्कॉन मंदिर का लोकार्पण मंगलवार को हो गया। इस भव्य मन्दिर का लोकार्पण सीएम नीतीश कुमार और राजपाल फागु चौहान ने किया। बता दे यह मंदिर 12 सालों से इसका निर्माण कार्य चल रहा था। यह मंदिर आने वाले दिनों में देशभर के सुप्रसिद्ध मंदिरों में से एक होगा।

मंदिर 100 करोड़ से अधिक की लागत से बना
यह दिव्य भव्य मंदिर 100 करोड़ से अधिक की लागत से बना है और इसमें एक साथ 10,000 से अधिक लोगों के अकोमोडेशन की क्षमता है। बहुमंजिला मंदिर का स्वरूप काफी दिव्य है और मंदिर के द्वितीय तल पर स्थित बांके बिहारी के कक्ष में बांके बिहारी की प्रतिमा का स्वरूप भी काफी दिव्य है। इस मंदिर की दिव्यता और भव्यता ऐसी है कि यह माना जा रहा है कि पटना में यह मंदिर एक प्रमुख पर्यटन केंद्र बनेगा।

2007 में मन्दिर का शिलान्यास हुआ था
इस मौके पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि बिहार शुरू से अध्यात्म की भूमि रही है और यह मंदिर प्रदेश में आध्यात्मिक चेतना के संचार में प्रमुख भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि अब उनके लिए गर्व की बात है कि साल 2007 में उन्होंने इस मंदिर का शिलान्यास किया था और आज इस मंदिर का लोकार्पण करने का भी उन्हें अवसर प्राप्त हुआ है।

एक साथ 1000 लोग बैठ कर प्रसाद ग्रहण कर सकते हैं।
बता दें कि यह भव्य बांके बिहारी मंदिर पूरे उत्तर भारत का सबसे बड़ा मंदिर है। तीन मंजिला मंदिर में एक भव्य ऑडिटोरियम बना हुआ है, जिसमें 700 लोग बैठ सकते हैं। इसके अलावा एक रेस्टोरेंट है. जिसमें शुद्ध और सात्विक भोजन एक साथ 200 लोग बैठ कर कर सकते हैं। इसमें एक कांफ्रेंस हॉल बनाया गया है। इसके अलावा प्रसाद घर बनाया गया है, जिसमें एक साथ 1000 लोग बैठ कर प्रसाद ग्रहण कर सकते हैं।

500 के करीब सीसीटीवी कैमरा इनस्टॉल है
वहीं, भविष्य की जनसंख्या को देखते हुए मंदिर को डबल डेकर बनाया गया है और इसमें 300 से अधिक गाड़ियों के पार्किंग की सुविधा उपलब्ध है। साथ ही साथ 500 के करीब सीसीटीवी कैमरा इनस्टॉल है। 70 कमरे का गेस्ट हाउस अतिथियों के लिए बनाया गया है। मंदिर में कुल चार लिफ्ट लगाए गए हैं। दिव्यांगों के लिए यहां सुविधा उपलब्ध है। 15 वर्ष पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 2007 में इस भव्य मंदिर का शिलान्यास किया था और आज यह गौरव का क्षण है कि उन्हीं के हाथों ही इसका लोकार्पण भी हुआ है।

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