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राजद सु्प्रीमो लालू प्रसाद यादव के संकटमोचक माने जाते थे रघुवंश प्रसाद सिंह उर्फ ब्रह्म बाबा


बिहार की राजनीति में पूर्व मुख्यमंत्री और राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के संकटमोचक के तौर पर कदम-कदम पर खड़े रहते थे ब्रह्म बाबा उर्फ रघुवंश प्रसाद सिंह। चारा घोटाले में लालू प्रसाद यादव का नाम आने के बाद अथवा बिहार में राजद गठबंधन की सरकार में लालू प्रसाद पर आने वाले कई संकटों से बचाया था ब्रह्म बाबा ने।

 दरअसल संप्रग सरकार में राष्ट्रीय जनता दल का प्रतिनिधित्व करने वाले प्रखर समाजवादी नेता  रघुवंश प्रसाद सिंह को लालू समेत राजनीतिक दल के वरिष्ठ नेता प्रेस से ब्रह्म बाबा कहते थे। बेदाग और बेबाक अंदाज वाले रघुवंश बाबू  राजद का सवर्ण चेहरा भी रहे।

जेपी आंदोलन(JP Movement) के समय मीसा के तहत साल 1974 में गिरफ्तार किये गये रघुवंश प्रसाद सिंह को मुजफ्फरपुर जेल में बंद किया गया था। यहां से बाद में उन्हें पटना के बांकीपुर जेल भेज दिया गया। यहीं पहली बार उनकी मुलाकात लालू प्रसाद यादव से हुई। लालू प्रसाद यादव उस समय पटना यूनिवर्सिटी में छात्र नेता थे। यहां से शुरू हुई दोनों की दोस्ती फिर राजनीतिक पटल पर छा गई। इस दौरान रघुवंश प्रसाद कई बार लालू के संकटमोचक बने।  यह लालू प्रसाद यादव की ही दोस्ती थी जिनके कारण उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कांग्रेस में शामिल होने के प्रस्ताव को ठुकरा दिया था। 

6 जून 1946 को वैशाली के शाहपुर में दिग्‍गज नेता और बिहार के वैशाली क्षेत्र के राष्‍ट्रीय जनता दल के सांसद डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह का जन्‍म हुआ था। अपने स्वभाव की वजह से वे राजद के साथ साथ सभी दलों के नेताओं के साथ घुले मिले हुए थे। साइन्स ग्रेजुएट और गणित में मास्टर डिग्री वाली शैक्षणिक योग्यता वाले डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह सीतामढ़ी के एक कॉलेज में गणित पढ़ाते थे।

बिहार के बड़े नेताओं में शामिल रघुवंश प्रसाद सिंह ने अपना राजनीतिक सफर जेपी आंदोलन में शुरू किया। 1977 में वह पहली बार विधायक बने और बाद में बिहार में कर्पूरी ठाकुर सरकार में मंत्री भी बने। वह बिहार के वैशाली लोकसभा क्षेत्र से पांच बार सांसद रह चुके हैं। इस बार वे इसी क्षेत्र से जेडीयू नेता से चुनाव हार गये थे।

जेपी आंदोलन से बने संबंध के बाद राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद और रघुवंश प्रसाद दोनों एक दूसरे के बेहद करीब भी रहे। जब 1990 में लालू प्रसाद बिहार के मुख्यमंत्री बने तो रघुवंश प्रसाद सिंह को विधान पार्षद बनाया, जबकि वह विधानसभा चुनाव हार चुके थे। वहीं जब एच डी देवेगौड़ा प्रधानमंत्री बने तो लालू प्रसाद ने उन्हें बिहार कोटे से मंत्री बनवाया।

पर सही मायनों में देखा जाए तो रघुवंश प्रसाद सिंह की राष्ट्रीय राजनीति में पहचान अटल सरकार के दौरान बतौर आरजेडी नेता के रूप मिली। तब लालू प्रसाद बिहार के मधेपुरा से लोकसभा चुनाव हार गये थे। रघुवंश प्रसाद सिंह लोकसभा में पार्टी के नेता बने। 

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