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मौसम की मार से झारखंड के फसलों पर पड़ा गहरा असर, इस बार होगी सबसे कम धान का उत्पादन

झारखंड में इस वर्ष राजनीति से लेकर मानसून तक की सरगर्मी है. बता दें, हेमंत सोरेन की सरकार में सियासी माहौल है. वहीं, बारिश भी थमने का नाम नहीं ले रही है. इसका गहरा परिणाम फसल के उत्पादन पर देखने को मिल रही है.  बता दें, चालू खरीफ मौसम में मात्र 18.32 लाख टन ही धान उत्पादन का अनुमान है. राज्य गठन के बाद इस वर्ष सबसे कम खाद्यान्न उत्पादन होने की उम्मीद है. यह जानकारी राज्य सरकार के कृषि विभाग ने भारत सरकार को भेजे गये पहले एडवांस एस्टीमेट में दी है.

31 अगस्त तक खरीफ मौसम के दौरान खेतों में लगी फसल के आधार पर रिपोर्ट भेजी जाती है. पहले अनुमान में खेतों में लगायी गयी फसलों को आधार बनाया जाता है. इसमें कहा गया है कि इस वर्ष खरीफ मौसम में 31 अगस्त तक 7.37 लाख हेक्टेयर जमीन में ही धान लग पाया है. प्रति हेक्टेयर 2485 किलो धान उत्पादन की उम्मीद की गयी है.

झारखंड में धान ही मुख्य फसल है. बीते साल करीब 51 लाख टन धान का उत्पादन हुआ था.कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग ने चालू खरीफ में कुल 26.01 लाख टन खाद्यान्न उत्पादन की उम्मीद की है. धान के बाद सबसे अधिक मक्के का उत्पादन होगा. करीब 4.35 लाख टन मक्के का उत्पादन हो सकता है. दो लाख टन अरहर के उत्पादन का अनुमान है. खरीफ में कुल 3.22 लाख टन दलहन का उत्पादन का अनुमान है.

बीते साल से 53 लाख टन हुआ था उत्पादन :
2021 में खरीफ के मौसम में करीब 53.69 लाख टन खाद्यान्न का उत्पादन हुआ था. 2020 में 57.64 लाख टन तथा 2019 में 41.22 लाख टन खाद्यान्न का उत्पादन हुआ था. वर्ष 2018 में 33 तथा 2017 में करीब 57 लाख टन खाद्यान्न का उत्पादन खरीफ मौसम में हुआ था.

कौन फसल और कितने उत्पादन का अनुमान

फसल कवरेज उत्पादन

धान 7.37 18.32

ज्वार 0.05 0.06

मक्का 2.04 4.35

रागी 0.11 0.97

अरहर 1.73 2.00

उरद 1.05 0.86

मूंग 0.33 0.24

(कवरेज लाख हेक्टेयर तथा उत्पादन लाख टन में)

 

 

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