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भोजपुरी विशेष: यूपी के पूर्वांचल में बाढ़ के टाइम प नेतृत्व, नीति अउरी नीयत के असली पहचान होला

भी पिछले हफ्ता के बात ह. डीएम बलिया से बात होत रहें. तीन चार पत्रकार साथी अउर साथे रहले. हमनी के सवाल पूछली कि बाढ़ के का हाल बा? उहा के बतवली जे पानी अब ओहरत बा . मन में तनी सकून मिलल.  काहे कि उत्तर प्रदेश या सटले बिहार में हर साल बाढ़ अउर बरसात से जतना तबाही होला उतना अउर कवनो चीज से नाहीं. एह साल त कोरोना के असर एक तरह से कोढ़ में खाज के काम करत बा. रहल बलिया के बात त उत्तर प्रदेश के अंतिम जिला होखला के नाते या नदियन के हर साल हुरपेटला के वजह से जिनगी के तबाही या संघर्ष के कहानी एके साथ शुरू होला.

ओह दिन कलटर साहेब इहो बतवले कि बाढ़ के किनारे वाला गांव के लोगन के आशंका बा कि जिउतिया के आसपास गंगा जी फेर बढी़ हे. इहाँ इ बतावल जरूरी बा कि जिउतिया के मेहरारू लोग खर जिउतिया परब के रुप में मनावें ला लो. एकर मानें ई भइल मुहं में इ कि भूखला में जल तक लेबे के मना बा . कवनों तिनका तक मुहं के आसपास ना जाए के चाही. इ बरत मेहरारू लोग अपना लडकन के लमहर जिनगी या सुखी जीवन खातिर करेला. जब पारन खातिर भात बनावें ला मतलब एक दिन के बाद जब बरत पूरा होला तब गंगा मैया नहाके, पूजा पाठ करके  भात के माड़ चढ़ावें के रिवाज रहें.

एकरा पीछे भरोसा इ रहें कि गंगा जी माड़ पीके अपना पुरनका जगह पे लौट अइहें यानि पानी ओहरे लागी. बरसात खतम भयला के एगो अउर परतोख दिया त रहें कि जब खर पे भुआ देखाई देबे लागे मतलब सफेद फूल देखा त उ बरसात के खतम भईला के संकेत होला. नदी के जब पानी बढ़ेला त नदी में एक किसिम के चमक पैदा होला या पानी ओहरे ला त मटमैलापन दिखाई देला. नदी के माड़ पियावे से लेकर, रंग रोगन के बारे में सारा चीज पुरनिया लोग अनुभव से जानत रहें लोग. ओ लोगन के मौसम, बाढ़ के पूर्वानुमान बिना कवनो यंत्र के सहायता के अनुभव पर आधारित रहें ऊ आजो उतने सच साबित होला.

इ बात कलटर साहेब के जानें के चाहीं कि बाढ़ किनारा के गांव वाला लोग ओही अनुभव के आधार पर दावा टरत रहें कि जिउतिया के समय गंगा जी बढीं हें या एकरा बाद पानी ओहरे लागी. अनुभव हर जगह काम आवेला. जीवन के बनावें संवारें से लेकर खेती किसानी तक में.भोजपुरी में पढ़ें: विरह के कसक से सराबोर ‘बारहमासा’, पिया के वियोगवा में कुहुके करेजवा

जीवन में सबसे जयादा जरुरत पड़े ला अनुभव के मुसीबत के समय. कोरोना काल  में अइसने मुसीबत आइल बा पूरी दुनिया में आदमी या समाज के सामने. अनुभवे के आधार पर इ दावा होता कि हर सौ साल के बाद अइसन बिपत्ति के सामना करें के पड़ल बा. जनधन के खूब हानि भयल बा,अंनत में बिपति के हराके जीवन पटरी पर आई गयल बा. कोरोना जरुर हारी. थोड़ा धीरज  या  हिम्मत रखें के जरूरत बा. गोस्वामी तुलसीदास जी कहलहुँ बानी  धीरज धर्म मित्र अरू नारी.  आपद काल परखिए चारी! इहा भोजपुरिया समाज के पूरब के जिलन में एह समय धीरज या हिम्मत के कमी देखात बा.

जिनगी दौड़ जीते के आपाधापी में जयादातर लापरवाह हो गईल बा लोग या कोरोना महामारी के नामे सुनत हदस जा ता लोग. उत्तर परदेश के पूर्व मंत्री घूरा राम के घरे लोग बतावत बा एही वजह से लोग मर गईल हा. लेखक, साहित्यिकार, बुद्धिजीवी रामजी तिवारी जी के भी कोरोना भयल रहल, बाकी उहाँ के हिम्मत से ओकर सामना करके परास्त क देहली हा. ऊहां के इ हो भरोसा रहें कि कोरोना चाहें जतना खतरनाक होखे लोगन के आशीर्वाद भी वो तुलना में तनिको कम हमरा संगे ना रहें. एक साहित्यिक, सामाजिक संवेदनशील आदमी एही तरह से कवनों मुसीबत के सामाना करेला. गांव में आज कल सभे अइसन  ना बा.

देखात ई बा कि या त कुछ लोग एकदम अलग थलग एकाकी जीवन जीयत बा. गोतिया पटीदार या खानदान के लोगन से कवनों मतलब न इखे रह गईल. दुख सुख परब तेवहार के अकेले मजा लूटत बा. दूसरका पिछले दस बीस साल में एगो तबका अइसन पैदा भयल बा जेकरा घरें नौकरी पेशा से, चाहें दलाली मुरदाली कर के कुछ दाम आ गईल बा. ओकरा  जिमे सवेरे से साझ तक एके काम रह गयल बा कि कवनों विधी ठाट से खायें पियें के जोगाड़ होत रहें. उ लोग चौबीस घंटा में खाली सुतही खातिर घरें जाता बा. बाकी समय चटी चौराहा पर आबाद रहता, जैइसे ओ लोगन के भी  प्रशासनिक तौर पर कवनों ड्यूटी लागल बा.

देखे में ई आवत बा इ लोग एक तरह से कोरोना वायरस के फैलावे में कैरियर के भूमिका निभावत बा. लाकडाउन के समय जब आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई ल रहें ओ समय सबसे परेशान इहे तबका रहें.  कुछ सामाजिक लोगन के बीच एही लापरवाही के वजह से गांवन में कोरोना फैलल हा आ अबहु फैलते जाता बा. बलिया के कलटर साहब इहो बतावत रहले कि कोरोना के रफ्तार थमहल जरूर बा एकदम रुकल नईखे. एहि दुबिधा परेशानी  में लटत बूडत बाढ़ बरसात के झेलत गंगा सरजू नदियन के दोबास कोनास में बसल पूरबी उत्तर परदेश आ बिहार के एकदम सटल बलिया में जिनगी अपना गति से ढ़हत ढ़िमिलात चलता.

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नौरंगा भुसौंला के तरफ गंगा जी के  रूद्र रूप के वजह से खूब ढाही लागल बा. नदी के कटाव से रास्ता पुलिया आ संपर्क ओ लोगन के बाकी दुनिया से कटी गई ल बा. दुबहड़ से दुबेछपरा तक गंगा जी के हुरपेटल ,धकियावल लोग राष्ट्रीय राजमार्ग पर आपन आशियाना जमा लेलें बा. गंगा जी हर साल  इहाँ के रहवासी लोगन के साथ अइसहीं दुरबेवहार करली. इहाँ लोगन के धीरज आ संघर्ष हर साल दरेरा देके परीक्षा ले ली. शायद ई पूछल चाहेली का हो बलिया के बागी लोग 1857के क्रांति 1942के लड़ाई आ1975के आपात के खूब डट के बढ़चढ़ के लड़ल लो. अब तुहि लोगन के अतयाचार हम खिसिया एके कभी काल तू लोगन इंतिहान लेबे आ देखें कि हमरा जगह के छेंक के तू लोग काबिज त नईख हो गईल .

कुछ साल पहिले   उत्तराखंड में हम आपन रौद्र रूप दिखवलें रहली  त ऊहां लोग कुछ हद तक समझल कि ओकर  मतलब का होला?तू लोग त कई साल से हमरा के घेरे बांधे के कोशिश करत बाड़ लो ओकर कवनों नतीजा निकलल?साच बात ई बा कि अरवुआ के घेरें बांधे खातिर जतना पइसा, रुपैया अबतक खरच भाईल बा, उतना में चीन के दीवार खड़ी हो जाइत,बाकी ऊ सब दलाल ठेकेदारों के वजह से हर साल रवुआ कोखें में समा जातबा. एकही बिनती बा अइसन लोगन जरुर आपन उत्तराखंड वाला रौद्र रूप दिखाईं. राउर डर भय इनहन के  नईखे.  गंगा जी चुपचाप गांव के लोगन के गुहार सुन ली, सुनके मौन साध गई ली. शायद कुछ लोगन के इशारा क गईली कि समय प सबके हम अपना हद के एहसास करावे ली. एहु लोगन  अबतक के  कुप्रयास सफल ना होई.

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एह ठीकदारन के दुहसाहस आ ढिठाई के वजह से देश के सांस्कृतिक धरोहर आचार्य हजारी परसाद दिवेदी ओझवलिया गांव के मुख्य दार भस गईल हा. ई उहे लोग ह जेकरा कवनों तरीका से रुपया कमाई में शर्म हया नईखे.  ए तबका के लोगन शिनाख्त कइल आ परदाफाश कइल जरूरी बा. ई उहे तबका के लोग ह जेकर बस चलें त मझौंवा घाट पर मुरदा के  कफन से पइसा वसूले में,चाहें कोरोना के इलाज खातिर आजमगढ़ के अस्पताल में भरती दोकटी, बलिया के  रामजीत सिंह  के जेब  से रूपये निकालें कवनों शरम परशासन डर भय नइखें. कोरोना काल में बिपति के समय बाढ़ बूड़ा आ बरसात कवनो काम के अंजाम तक पहुंचावें खातिर  इ जरूरी बा कि अइसन लोगन के गतिविधि आ कार्यविधि पर लगाम लगे.

मोदी, योगी आ बलिया के कलटर साहेब बा कवनो उपाय रवुआ सबके पाले? काहें जवाबदेही त रवुआ सबके बा ए समय. रवुआ सबसे उम्मीद भी अभी लोगन के अभी कायम बा. एह मुसीबत के घड़ी में ही नेताओं के नीति नेतृत्व और नीयत के असली परीक्षा होला.

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