भारत-चीन विवाद के बीच सिक्किम में क्यों बढ़ी सामान ढोने वालों की मांग

गंगटोक. भारत-चीन सीमा विवाद (India-China Border Dispute) बढ़ने के बाद इस साल सिक्किम (Sikkim) में अचानक सेना द्वारा पोर्टर यानि सामान ढोने वाले लोगों की मांग दस गुना बढ़ गई है. ये पोर्टर भारत-चीन सीमा पर महत्वपूर्ण निर्माण कर रही अलग-अलग एजेंसियों को उनकी जरूरत का सामान पहुंचाते हैं. हर साल सिक्किम में 600 से 700 पोर्टर की मांग होती है, ये मांग भारतीय सेना (Indian Army) द्वारा होती है और इन्हें भारत-चीन सीमा पर नाथुला पास (Nathula Pass) के ऊपर ले जाया जाता है, लेकिन इस बार परिस्थितियां बिलकुल अलग हैं सिक्किम में से अब तक 6000 स्थानीय निवासी, ज्यादातर युवाओं को इस साल भारत-चीन सीमा नाथुला पास और अन्य सीमावर्ती इलाकों में ले जाया गया है जहां उनको सेना के सहयोग के काम में लगाया जा रहा है, इन काम में निर्माण कार्य, ढुलाई, पत्थर काटना व अन्य काम शामिल हैं.

सेना के पोर्टर चयन करने की पूरी प्रकिया है. इसके लिए पहले एक परिवार या लोकेलिटी को एक आवेदन दिया जाता है फिर जितने लोग पोर्टर के काम के लिए इच्छुक होते हैं उनकी सूची तैयार की जाती है. फिर सेना इन्हें ऊपरी इलाकों में ले जाती है, वहां पर चार से पांच दिन इनको रखा जाता है फिर जो उस एल्टीट्यूड टेस्ट में पास होता है उन्हें ऊंचाई वाली जगहों पर ले जाया जाता है. इस बार दस गुना ज्यादा पोर्टर को ले जाना इस बात की ओर इशारा करता है कि चीन की चाल का जवाब भारतीय सेना उसी अंदाज में दे रही है. फोर्स की तैनाती, आधुनिकरण और तमाम परियोजनाओं का काम तेजी से किया जा रहा है. इस कामों का आधार सिक्किम के युवा बन रहे हैं.

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पर्यटन ठप्प होने के चलते युवाओं को मिला रोजगार का नया जरियान्यूज18 इंडिया ने उन परिवारों से मुलाकात की जिनके सदस्य ऊपर भारतीय सेना की मदद करने गए हैं. यहां एक बिल्डिंग में 8 लोगों ने आवेदन किया था जिसमें से दो लोगों का चयन सेना के पोर्टर के तौर पर हुआ और अब वो नाथुला में हैं.

वहां मौजूद लोगों ने बताया कि मोना बहादुर, अल्बीना और नन्नू इसी बिल्डिंग में रहते हैं. इनका घर भारत-चीन सीमा से सिर्फ 45 किलोमीटर दूर है इनके परिवार के लोग नाथुला पास गए हैं. मोना बहादुर और उनके भाई ने पोर्टर के लिए अप्लाई किया था जिसके बाद उनके बड़े भाई का भी सेलेक्शन हुआ. इसके बाद मोना का भी चयन को पोर्टर के लिए हुआ है. इसके लिए वह दिन-रात कसरत और अन्य तैयारी करते हैं.

कोरोना वायरस के चलते जब सिक्किम में मुख्य व्यवसाय पर्यटन पूरी तरीके से ठप्प हो चुका है तो पोर्टर का काम यहां के युवाओं के लिए रोजगार का नया जरिया बना है. न्यूज18 इंडिया ने जब कुछ युवाओं से इस बाबत बात की तो उन्होंने भी इस काम को करने के लिए अपना पूरा जोश दिखाया.