भारत-चीन के बिगड़ते रिश्ते का असर, बिहार में एक साल पीछे चली गयी BSNL की 4जी सेवा

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भारत और चीन के बिगड़ते रिश्ते का असर राज्य में 4जी सेवा पर पड़ी है। चाइनीज कंपनी जेडटीई का टेंडर रद्द होने के बाद बीएसएनएल की 4जी सेवा पर ग्रहण लग गया है। टेंडर रद्द हुए भी दो महीने हो चुके हैं लेकिन अब तक टेंडर की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है। 

अगर टेंडर की प्रक्रिया भी शुरू होती है तो छह महीने लग जायेंगे। उपकरण लगने में तीन से चार महीने लगेंगे। यानी राज्य में 4जी सेवा एक साल पीछे चली गई है, जबकि चाइनीज कंपनी 4जी के सारे उपकरण ले आयी थी। जुलाई में ही 1200 4जी टावर लगा दिया जाना था और 4जी सेवा भी शुरू कर जानी थी। चीन और भारत के बीच बिगड़े हालात के कारण ऐन मौके पर टेंडर रद्द हो गया। इसके कारण 4जी सेवा अटक गयी है। 

राज्य में अभी बीएसएनएल के चार हजार टावर लगे हैं। इसमें 1200 3जी और 1800 2जी टावर लगे हैं। 320 3जी टावर को 4जी में कंवर्ट किया जा चुका है। इसके तहत सबसे पहले पटना में 4जी सेवा लांच करना था। इसके बाद मुजफ्फरपुर, भागलपुर और गया में बीएसएनएल 4जी लांच किया जाना था। 

भारत नेट परियोजना भी कई जगहों पर बाधित  
बीएसएनएल के भारत नेट परियोजना भी कई जगहों पर बाधित है। भारत नेट परियोजना के तहत 11 हजार ग्राम पंचायतों में ऑप्टिकल फाइबर के माध्यम से ब्रॉडबैंड सेवा पहुंचायी जानी है। बीएसएनएल द्वारा 5 हजार 41 पंचायतों में ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाया जा चुका है। इसमें 5 हजार 67 जगहों पर टेस्टिंग का काम चल रहा है। उन्होंने बताया कि भारत नेट योजना के तहत गांवों में रहने वाले लोगों को ऑप्टिकल फाइबर से 100 एमबीपीएस की इंटरनेट स्पीड मिलेगी। 
पंचायत में रहने वाले लोगों को पंचायत भवन में ही ई-एजुकेशन, ई-मेडिशिन, ई-कॉमर्स और राइट टू सर्विस सेवा पंचायत में ही मिलेगी। इसका मतलब है जाति प्रमाणपत्र, आय प्रमाणपत्र बनाने के लिए शहरों की खाक छाननी नहीं पड़ेगी। बिहटा और अलावलपुर में ई-चौपाल लगेगी। राज्य के 11 हजार पंचायतों में ऑप्टिकल फाइबर बिछाये जाने हैं। यह विश्व की सबसे बड़ी योजना है। सबसे सरल माध्यम से लोगों तक पहुंचा जा सकेगा। इस योजना के तहत ऑप्टिकल फाइबर से गांव-गांव तक इंटरनेट की सेवा पहुंचाने का काम रेलटेल, बीएसएनएल और पावर ग्रिड कॉरपोशन इंडिया कर रहा है।