बिहार में शिक्षकों की ईपीएफ योजना लागू होते ही यूटीआई योजना में सरकार का अंशदान बंद

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बिहार के पंचायती राज संस्थान एवं नगर निकायों के तहत पहली से लेकर 12वीं तक के स्कूलों में कार्यरत करीब साढ़े तीन लाख शिक्षकों के लिए पहली सितम्बर से ईपीएफ योजना लागू करने के साथ ही सरकार ने इनके लिए पहले से संचालित ‘यूटीआई रिटायरमेंट बेनिफिट पेंशन फंड’ योजना को बंद करने का निर्णय लिया है। 

राज्य सरकार का शिक्षा विभाग ‘यूटीआई रिटायरमेंट बेनिफिट पेंशन फंड’ में प्रति शिक्षक और पुस्तकालयाध्यक्ष 200 रुपए का अपना अंशदान 31 अगस्त तक ही देगा। बुधवार को शिक्षा विभाग के उप सचिव अरशद फिरोज द्वारा जारी अधिसूचना में कहा गया है कि चूंकि शिक्षकों व पुस्तकालयाध्यक्षों के लिए 1 सितम्बर, 2020 से ईपीएफ को लागू करने का निर्णय लिया गया है। हालांकि, 31 अगस्त के बाद शिक्षा विभाग भले ही यूटीआई पेंशन फंड में अपना अंशदान नहीं देगा लेकिन संबंधित शिक्षक, पुस्तकालयाध्यक्ष चाहें तो स्कीम में बने रह सकते हैं। अथवा एकमुश्त राशि ले सकते हैं, क्योंकि इस योजना में हर शिक्षक, पुस्तकालयाध्यक्ष को व्यक्तिगत रूप में यूनिट आवंटित किया गया है। 

शिक्षा विभाग ने एक और बड़ा निर्णय लेते हुए ईपीएफ योजना से आच्छादित होने वाले शिक्षकों को सेवा अवधि में उनके निटकतम आश्रित को एकमुश्त चार लाख रुपए की अनुग्रह अनुदान की राशि से भी अलग कर दिया है। अधिसूचना में कहा गया है कि चूंकि ईपीएफ एक्ट 1952 से आच्छादित शिक्षक, लाइब्रेरियन की सेवा काल में मृत्यु होने पर उनके निकटतम आश्रित को अनुग्रह राशि दिए जाने का प्रावधान है इसलिए 4 लाख के अनुग्रह अनुदान की राशि देने के प्रावधान को ईपीएफ से आच्छादित होने वाले शिक्षकों व पुस्तकालयाध्यक्षों को अलग करने का निर्णय लिया जाता है। 

उपरोक्त दोनों ही निर्णयों पर राज्य मंत्रिमंडल की 18 अगस्त की बैठक में ही मुहर लग गयी थी। गौरतलब हो कि शिक्षक व पुस्तकालयाध्यक्षों की सेवाकाल में मृत्यु होने पर उनके आश्रितों को 4 लाख के अनुग्रह अनुदान का प्रावधान 8 सितम्बर 2015 से लागू था। वहीं यूटीआई यूटीआई स्कीम का प्रावधान 24 अगस्त 2012 और 2 जनवरी 2015 के प्रभाव से था।