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बिहार में रिपोर्ट बिना बीमारियों से मौत का डेटा बुक इंटरनेशनल क्लासीफिकेशन ऑफ डिजीज में नहीं हो रहा शामिल

जिलों की लापरवाही से लोगों की मौत के कारणों का प्रमाणीकरण अटक गया है। राज्यभर के स्वास्थ्य संस्थानों में होने वाली मौत के अंतिम कारण का प्रतिवेदन अटका हुआ है। इस कारण बिहार में अलग-अलग बीमारियों से होने वाली मौत का आंकड़ा स्पष्ट नहीं हो रहा है। राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बनने वाले डेटा में बिहार की इन मौतों को शामिल ही नहीं किया जा रहा है। सांख्यिकी विभाग ने इस पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए जिलों को मौत के प्रमाणीकरण का आदेश दिया है, ताकि इंटरनेशनल क्लासीफिकेशन ऑफ डिजीज के आंकड़ों में बिहार में बीमारी से होने वाली मौत के आंकड़ों को शामिल किया जा सके।
सांख्यिकी विभाग ने बताया है कि एक जनवरी 2020 से सात सितंबर 2020 तक सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में कुल 20004 लोगों की मौत हुई है, लेकिन इनमें से 9422 की ही मौत का कारण स्पष्ट किया गया है। यानी कुल 47 फीसदी लोगों की मौत का ही प्रमाणीकरण हो पाया है। जिलों की इस लापरवाही के कारण इंटरनेशनल क्लासिफिकेशन ऑफ डिजीज के आंकड़ों में इस अवधि में हुए 10582 मौत के रिकार्ड शामिल नहीं हो सके। अर्थ एवं सांख्यिकी निदेशालय के संयुक्त निदेशक सह मुख्य रजिस्ट्रार (जन्म और मृत्यु) वंशीधर मिश्र ने इसपर कड़ी आपत्ति जतायी है। उन्होंने कहा है कि इन महत्वपूर्ण आंकड़ों का उपयोग सरकार स्वास्थ्य से संबंधित नीति तय करने में करती है। अब जब बीमारी की ही जानकारी नहीं दी जाएगी तो ऐसे में स्वास्थ्य संबंधी नीति प्रभावी नहीं हो पाएगी।

कोविड, एईएस व जेई से मौत का नहीं मिला डेटा
सांख्यिकी विभाग ने कहा है कि राज्य के तमाम जिलों से कोविड 19, एईएस व जापानी इंसेफलाइटिस से मौत की सूचना प्राप्त हो रही है। लेकिन जिलों से मिलने वाले मौत के कारण संबंधी चिकित्सीय प्रमाणीकरण रिपोर्ट में इन तीन गंभीर बीमारियों का ही जिक्र नहीं है। विभाग ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय सांख्यिकी वर्गीकरण के अंतर्गत अन्य बीमारियों के अलावा कोविड 19, एईएस व जेई का भी कोड वर्गीकृत है। लेकिन जिलों से आने वाली रिपोर्ट में इन बीमारियों के वर्ग में मौत दर्शायी ही नहीं गई है। इस कारण अंतरराष्ट्रीय सांख्यिकी वर्गीकरण में इन बीमारियों से होने वाली मौत का आंकड़ा शामिल नहीं हो पा रहा है। विभाग ने कहा है कि अब हर हाल में अपने त्रैमासिक रिपोर्ट में इन तीन बीमारियों से होने वाली मौत की जानकारी भी दर्ज करें, ताकि इससे शोध के अलावा अर्थ व स्वास्थ्य नीति बनाने में सरकार हो सहायता मिल सके।

 

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