बिहार में कर्मियों की लापरवाही से तारीख पर तारीख!, अब प्लॉट टू प्लॉट सर्वे की नयी डेडलाइन 5 सितंबर

बिहार में कर्मियों की लापरवाही से तारीख पर तारीख!, अब प्लॉट टू प्लॉट सर्वे की नयी डेडलाइन 5 सितंबर

तारीख पर तारीख…। 8 अगस्त, फिर 31 अगस्त और अब पांच सितम्बर। राज्य में हर खेत को पानी पहुंचाने की योजना के लिए किये जा रहे सर्वे को पूरा करने की यह नयी डेडलाइन है। सर्वेकर्ता को नक्शा मिल गया। कर्मियों की ट्रेनिंग हो गई। 

कर्मियों ने तय समय पर नक्शा का अध्ययन भी कर लिया, लेकिन बात जब जमीन पर सर्वे शुरू करने की हुई तो मामल फंस गया। पहले बाढ़ ने परेशानी खड़ी की, फिर सलाकारों की हड़ताल और अब लापरवाही सामने आ रही है। लिहाजा विभाग ने नयी डेडलाइन तय करने के साथ लापरवाह कर्मियों पर कार्रवाई भी शुरू कर दी है।  

विभाग ने काम नहीं करने वाले किसान सलाहकारों के मानदेय में कटौती का आदेश दिया है। जितने दिन वह सर्वे से गायब रहेंगे उतने दिन का मानदेय उन्हें नहीं मिलेगा। साथ ही इस काम की सबसे कम प्रगति वाले चार जिलों के जिला कृषि पदाधिकारियों से जवाब तलब किया गया है। कटिहार, पूर्णिया, पश्चिम चम्पारण और मधेपुरा की प्रगति दो-तीन प्रतिशत ही है। लिहाजा वहां के डीएओ से पूछा गया है कि क्यों नही उनके खिलाफ  कार्रवाई को सरकार को लिखा जाए। 
 
कृषि विभग ने दो दिन पहले प्लॉट-टू प्लॉट सर्वे की समीक्षा की तो पता चला कि अधिकतर जिलों में काम की गति बहुत मंद है। पूर्णिया के 71, कटिहार के पांच, पश्चिम चम्पारण के 80 और मधेपुरा के 23 हल्का में अभी काम शुरू भी नहीं हुआ है। जहां काम शुरू हुआ है, वहां गति बहुत मंद है। 

काम समय पर पूरा हो इसके लिए कृषि सचिव डॉ. एन सरवण कुमार ने सर्वे में लगे कर्मियों को किसी दूसरे काम में नहीं लगाने का निर्देश सभी डीएम को पहले ही दे दिया है। शुरू में काम पूरा करने के लिए अंतिम तारीख आठ अगस्त रखी गई थी। लेकिन बाढ़ के कारण काम रुक गया। बाद में कृषि सचिव ने एक अगस्त से फिर काम शुरू करने का निर्देश दिया। 31 अगस्त तक सर्वे पूरा कर लेना था। अब विभाग ने पांच दिन की मोहलत दी है।

पहले की तय कार्ययोजना  
13 जुलाई को नक्शा उपलब्ध कराना 
14 जुलाई को एनआइसी में ट्रेनिंग 
15 व 16  जुलाई को जिलों में ट्रेनिंग व नक्शा अध्ययन
17 जुलाई से जमीनी सर्वे शुरू 
8 अगस्त को सर्वे पूरा करना