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बिहार में एससी-एसटी के तहत दर्ज केस लंबित क्यों हैं, हकीकत जानने जिलों में जाएगी सीआईडी की टीम

बिहार में अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज मामले लंबित क्यों हैं, इसकी हकीकत जानने पुलिस अफसर फील्ड में जाएंगे। सीआईडी के अधीन बने कमोजर वर्ग में तैनात पुलिस अफसरों को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है। फील्ड में भ्रमण के दौरान ये अनुमंडल स्तर पर लंबित मामलों की समीक्षा करेंगे और उसके जल्द निपटारे के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश भी जारी करेंगे।

700 के करीब लंबित हैं मामले
दिसम्बर 2019 तक एससी-एसटी एक्ट से जुड़े करीब 5000 मामलों की जांच लंबित थी। लंबित मामलों के निष्पादन के लिए सीआईडी के निर्देश पर अभियान शुरू किया गया। कुछ दिनों पहले एडीजी सीआईडी विनय कुमार और आईजी कमजोर वर्ग रत्न संजय ने सभी एसडीपीओ के साथ इसकी समीक्षा भी की थी। मुख्यालय के स्तर पर समीक्षा का काम सीआईडी के अफसर खुद कर रहें हैं, जबकि फील्ड में यह जिम्मेदारी रेंज आईजी और डीआईजी को सौंपी गई है। केस के आईओ, थानेदार या एसडीपीओ को बुलाकर एक-एक मामले की समीक्षा हो रही है। अबतक करीब 4300 लंबित मामलों का निष्पादन किया जा चुका है। उम्मीद है कि बचे हुए करीब 700 मामलों की जांच भी जल्द पूरी कर ली जाएगी। 

एसपी-डीएसपी फील्ड में जाएंगे
एससी-एसटी एक्ट के तहत लंबित मामलों के जल्द निष्पादन के लिए एक और कदम उठाया गया है। एसपी (कमजोर वर्ग) के साथ ही एससी-एसटी कोषांग के प्रभारी डीएसपी को फील्ड में भेजने का निर्णय लिया गया है। दोनों अधिकारी उन अनमुंडलों में जाएंगे जहां लंबित कांडों की संख्या ज्यादा है। वहीं केस के आईओ, थानेदार और एसडीपीओ के साथ इसकी समीक्षा होगी। 

60 दिनों में पूरा करना है अनुसंधान
एससी-एसटी एक्ट के तहत दर्ज होनेवाले मामलों में जांच 60 दिनों में पूरा करना होता है। कुछ वजहों से कई मामलों का अनुसंधान लंबित रह जाता है। अधिकारियों के मुताबिक इसमें मुख्य रूप से शिकायतकर्ता के बाहर चले जाने, गवाह के उपस्थित नहीं रहने या फिर गिरफ्तारी नहीं होने के चलते विलंब होता है। समीक्षा के दौरान यह भी देखा जाएगा कि कहीं आईओ या किसी अन्य पुलिस पदाधिकारी की लापरवाही की वजह से मामला लंबित तो नहीं है। ऐसा पाया जाता है तो संबंधित पुलिस अधिकारी पर कार्रवाई होगी।  
 

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