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बिहार चुनाव 2020: पटना के छह विधानसभा क्षेत्रों में रहेगी अर्द्धसैनिक बलों की तैनाती


पटना जिले के 14 विधानसभा क्षेत्रों में चार ऐसे हैं, जिसे प्रशासन ने संवेदनशील की श्रेणी में रखा है। इसीलिए इन विधानसभा के संवेदनशील इलाकों में अर्धसैनिक बलों की तैनाती की जाएगी ताकि चुनाव शांतिपूर्ण एवं निष्पक्ष हो सके। प्रशासन अभी से ही तैयारी में जुट गया है। 

पटना जिले के लिए लगभग डेढ़ सौ कंपनियों की डिमांड की गई है। पिछले लोकसभा चुनाव की तुलना में इस बार मतदान केंद्रों की संख्या बढ़ी है। इसीलिए भी पुलिस बल की अधिक जरूरत महसूस की जा रही है। जिन विधानसभा क्षेत्र को संवेदनशील की श्रेणी में रखा गया है उसमें मसौढ़ी, पालीगंज, दानापुर, मनेर, बाढ़ और मोकामा है। मसौढ़ी और पालीगंज विधानसभा नक्सल प्रभावित होने के कारण यहां पुलिस बल की मुस्तैदी ज्यादा होगी। हालांकि नक्सलियों का प्रभाव अब इन इलाकों में कम हो गया है फिर भी पूर्व में घटित घटनाओं को देखते हुए प्रशासन इन दो विधानसभा क्षेत्रों को संवेदनशील श्रेणी में रखा है। 

पालीगंज का इमामगंज इलाका पहले से ही सुर्खियों में रहा है। यहां कई बड़ी घटनाएं हुई हैं। इसी प्रकार मसौढ़ी विधानसभा क्षेत्र में 1990 से 2005 के बीच कई बड़े वारदात हुए हैं इसे लेकर प्रशासन काफी सतर्क रहता है। हाल के वर्षों में हुए चुनाव में इन दोनों विधानसभा क्षेत्रों में कोई बड़ी वारदात नहीं हुई है फिर भी प्रशासन सतर्कता बरत रहा है। मनेर और दानापुर इलाके में पूर्व में कई जगहों पर बूथ कब्जे को लेकर प्रशासन में शिकायत दर्ज कराई जा चुकी हैं। खासकर इन दो विधानसभा क्षेत्रों के दियारा इलाके में ऐसी घटनाएं पूर्व में घटित हो चुकी हैं। 

मोकामा विधानसभा क्षेत्र में वर्चस्व की लड़ाई अक्सर हुआ करती है। इस विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय विधायक अनंत सिंह चुनाव जीते हैं। यहां चुनावी रंजिश की घटनाएं सामने पूर्व में सामने आ चुकी हैं। इसीलिए प्रशासन इस क्षेत्र को संवेदनशील घोषित किया है। हाल के चुनाव में लहरिया टोला वार्ड संख्या एक और 14 तथा गोरिया टोला वार्ड संख्या 10 11 और एक कई घटनाएं हो चुकी हैं। मोकामा से सटे होने और टाल इलाका होने के कारण बाढ़ को भी प्रशासन संवेदनशील मान रहा है। 

संवेदनशील इलाकों में 54 फीसदी तक मतदान
पटना जिले के जिन विधानसभा क्षेत्र को संवेदनशील घोषित किया गया है, वहां मतदान का प्रतिशत अन्य विधानसभा क्षेत्रों से थोड़ा कम  होता है। मतदान का प्रतिशत कम होने का एक कारण यह भी है कि सामान्य विधानसभा क्षेत्रों में  5 बजे तक वोटिंग होती है। लेकिन इन विधानसभा क्षेत्रों में  4 बजे ही मतदान समाप्त कर दिया जाता है।  प्रशासन को आशंका रहती है कि कहीं ईवीएम के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं कर दे तथा उसे सुरक्षित मतगणना स्थल पर मंगाया जा सके। संवेदनशील इलाकों में भी पिछले लोकसभा और विधानसभा चुनाव में 54 फीसदी तक मतदान हुआ है। जबकि अन्य विधानसभा क्षेत्रों में 56 फीसदी से अधिक वोट डाले जाते हैं।

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