फारबिसगंज विधानसभा सीट: 1995 के बाद भाजपा की प्रयोगशाला है अररिया जिले का ये क्षेत्र

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यूं तो बिहार के अररिया जिले का फारबिसगंज विधानसभा क्षेत्र अस्तित्व काल से ही कांग्रेसियों का गढ़ रहा है, लेकिन समय के साथ यह क्षेत्र भाजपा की प्रयोगशाला बन गया। वर्ष 1995 के बाद सिर्फ एक बार वर्ष 2000 में बसपा के टिकट पर जाकिर हुसैन खान ने इस सीट पर कब्जा जमाया था। इस सीट से 1972 में प्रसिद्ध साहित्यकार फणीश्वर नाथ रेणु ने भी अपनी किस्मत आजमायी थी मगर वे सफल नहीं हो पाए थे। पूर्व में यह क्षेत्र समाजवादियों का गढ़ रहा है। चुनाव बेशक कांग्रेस जीतती रही मगर आजादी के बाद से लोहिया, जयप्रकाश, जॉर्ज फर्नांडिस सरीखे नेताओं की शरणस्थली भी रही है।

फारबिसगंज विधानसभा क्षेत्र से सबसे ज्यादा सात बार कांग्रेस प्रत्याशी सरयू मिश्र ने जीत दर्ज की है। यहां के प्रथम विधायक स्वर्गीय बोकाय मंडल फारबिसगंज के जनक के रूप में स्थापित हैं। नगर परिषद, फारबिसगंज कॉलेज सहित कई संस्थानों की स्थापना में उनका अहम योगदान रहा। यहां के पूर्व विधायक डूमर लाल बैठा न केवल सांसद बने, बल्कि केंद्रीय रक्षा राज्यमंत्री पद पर आसीन रहे। क्षेत्र का सात सात बार प्रतिनिधित्व कर चुके सरयू मिश्र बिहार सरकार में स्वास्थ्य मंत्री पद पर आसीन रहे। वर्ष 2000 की बात छोड़ दें तो विगत 1995 से लगातार भाजपा का विधायक रहने के बाद भी किसी को मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिल पायी है। सामान्य सीट वाले फारबिसगंज विधानसभा क्षेत्र में वर्तमान में विद्यासागर केशरी भाजपा के विधायक हैं। विगत 2005 से इस सीट पर भाजपा का कब्जा रहा है। यहां हर चुनाव में भाजपा अपना प्रत्याशी बदलती रही है। 

परिसीमन में खास बदलाव नहीं 
2009 के परिसीमन के बाद फारबिसगंज विधानसभा में कोई खास बदलाव नहीं हुआ है। फारबिसगंज प्रखंड की 32 पंचायत,  फारबिसगंज नगर परिषद और  नगर पंचायत जोगबनी इस विधानसभा क्षेत्र में शामिल हैं।

कई कारणों से चर्चा में रहा है फारबिसगंज
नेपाल से जुड़े रहने और ऐतिहासिक सुल्ताना माई मंदिर से फारबिसगंज की अलग पहचान रही है। फणीश्वर नाथ रेणु को लेकर यह क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चित रहा है। पांच जून 1973 को पहली बार नेपाल में जारी लोकतांत्रिक संघर्ष के दौरान नेपाल के शाही विमान को अपहरण कर फारबिसगंज के अर्द्ध निर्मित सैनिक हवाई पट्टी पर उतारा गया था। इसमें नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री गिरिजा प्रसाद कोइराला सहित भारत-नेपाल के कई लोगों के खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज हुई थी। इस घटना ने फारबिसगंज को रातोंरात विश्वस्तर पर सुर्खियों में ला दिया था।  

कई समस्याओं का अब तक नहीं हुआ है निदान
1962 में भारत चीन युद्ध के दौरान यहां सैन्य इस्तेमाल के लिए हवाई अड्डा का निर्माण शुरू किया गया जो आजतक अधूरा है। 1973 में स्वर्गीय संजय गांधी ने यहां जूट मिल का शिलान्यास किया था, जो आज तक पूरा नहीं हुआ। फारबिसगंज के पूर्वी भाग को बाढ़ से बचाने सहित कई जिले के लिए अति महत्वपूर्ण महानंदा बेसिन परीयोजना की शुरुआत अभी तक नहीं हो पाई है।  जून 2011 को  बियाडा में निर्माणाधीन स्टार्च एवं ग्लूकोज फैक्ट्री होकर रास्ता विवाद में पुलिस गोली से चार लोगों की मौत का मामला आज भी लोगों के जेहन में है।

कुल मतदाता- 3,30,848
महिला-156345
पुरुष-174495
थर्ड जेंडर-8
पंचायत- 32
नगर परिषद 01
नगर पंचायत- 01

 अब तक चुने गये:
 1952-बोकाई मंडल (कांग्रेस)  
 1957- डूमर लाल बैठा (कांग्रेस)
 1957-  शीतल गुप्ता (कांग्रेस)
 1962-सरयू मिश्र (पीएसपी)
 1967-  सरयू मिश्र (कांग्रेस)
 1969-  कांग्रेस के सरयू मिश्र
 1972-सरयू मिश्र (कांग्रेस)
 1977-सरयू मिश्र (कांग्रेस)
 1980-  सरयू मिश्र (कांग्रेस)
 1985-  सरयू मिश्र (कांग्रेस)
 1990-    मयानंद ठाकुर (भाजपा)
 1995-  मायानंद ठाकुर (भाजपा)
 2000-  जाकिर हुसैन खान (बीएसपी)
 2005- (फरवरी)  लक्ष्मीनारायण मेहता (भाजपा)
 2005- (अक्टूबर)  लक्ष्मीनारायण मेहता (भाजपा)
 2010-   पदम पराग राय वेणु (भाजपा)
 2015-  विद्यासागर केसरी (भाजपा)