पिता के बाद पुत्र भी बने मंत्री, तीन दशक से सत्ता की अग्रिम पंक्ति में मधुबन

पिता के बाद पुत्र भी बने मंत्री, तीन दशक से सत्ता की अग्रिम पंक्ति में मधुबन

सत्याग्रह की धरती चंपारण में मधुबन ने आजादी के बाद राजनीति के कई पंथ देखे। थोड़ा है, थोड़े की जरूरत है … इस चाह वाली यहां की जनता ने कई नेताओं को बार-बार चुना। उसे सत्ता की अग्रिम पंक्ति तक भी पहुंचाया। इस वीआईपी सीट से पिता के बाद पुत्र भी मंत्री बने। मधुबन विधान सभा क्षेत्र में समीकरणों की एक सीमा है, और उस सीमा से आगे की राजनीति न सिर्फ इस सीट का तकदीर तय करती, बल्कि जिले के कई विस क्षेत्रों में वोट का गणित भी प्रभावित करती है।
 2020 के चुनावी घमासान पर सबकी नजरे हैं। पिछले तीन चुनावों से एनडीए की झोली में आ रही इस सीट को अपने दामन में समेटना महागठबंधन के लिए बड़ी चुनौती है। यहां से विधायक राणा रंधीर अभी बिहार सरकार में सहकारिता मंत्री हैं। वे सबसे पहले वर्ष 2005 के फरवरी माह में हुए चुनाव में राजद के टिकट पर चुनाव जीत कर विधायक बने। हालांकि उसी वर्ष अक्टूबर माह में हुए चुनाव में वे जदयू के शिवजी राय से चुनाव हार गये। फिर वर्ष 2010 में हुए विधानसभा चुनाव में जदयू के शिवजी राय ने जीत हासिल की। बाद में राणा रंधीर भाजपा में शामिल हो गये। वे वर्ष 2015 में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी के रूप में जीत हासिल कर विधायक बने। चुनाव के बाद जब भाजपा जदयू के साथ सरकार में शामिल हुई तो उन्हें सहकारिता विभाग का मंत्री बनाया गया। वे एक बार फिर से चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं। वहीं, यहां से दो बार विधायक रहे शिवजी राय भी इस बार पुन: चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी में हैं। कोरोना काल में फिलहाल नेताओं की सक्रियता सीमित है। मगर, अंदरखाने का हलचल अभी से इसके तीन प्रखंडों मधुबन, फेनहारा व पकड़ीदयाल में चुनावी आंच तेज कर रहा।

चार बार विधायक व सांसद बने सीताराम सिंह
मंत्री राणा रणधीर के पिता सीता राम सिंह बिहार के प्रमुख राजनीतिक शख्सियत के रूप में गिने जाते थे। वे वर्ष 1985 से लगातार चार बार मधुबन से विधायक रहे। वे वर्ष 1985 में जनता पार्टी से चुनाव जीते। उसके बाद वे वर्ष 1990 व वर्ष 1995 में जनता दल के टिकट से विधायक बने। वहीं, वर्ष 2000 में राजद के टिकट से चुनाव जीते। वे वर्ष 1990 से 95 तक बिहार के परिवहन मंत्री व 1995 से 2004 तक बिहार सरकार में खनन एवं भूतत्व मंत्री रहे। मंत्रालय में रहते हुए उन्हें पशुपालन विभाग का अतिरिक्त प्रभार भी मिला था। वर्ष 2004 में शिवहर के सांसद भी बने।

तीन बार कांग्रेस तो तीन बार सीपीआई का रहा सीट पर कब्जा
मधुबन सीट पर 1962,1977 व 1980 में हुए चुनाव में कांग्रेस ने जीत हासिल की। जिसमें कांग्रेस के टिकट पर वर्ष 1962 में मंगल प्रसाद यादव, 1977 में रूपलाल राय व 1980 में ब्रजकिशोर सिंह विधायक बने। चुनाव में जीत हासिल करने के बाद ब्रजकिशोर सिंह बिहार सरकार में मंत्री भी बने। वहीं, सीपीआई के उम्मीदवार महेंद्र भारती ने क्रमश: 1967 व 1969 में  जीत हासिल की। वहीं 1972 के चुनाव में सीपीआई की टिकट पर राजपति देवी चुनाव जीतीं।

 

कुल वोटर: 250215
पुरुष वोटर: 133271
महिला वोटर: 116944
कुल आबादी: 535329
थर्ड जेंडर : 13
कुल प्रखंड: 03,
 मतदान केंद्र: 374

अब तक जीते
1957: रुपलाल राय, आईएनडी
1962: मंगल प्रसाद यादव कांग्रेस
1967: महेंद्र भारती सीपीआई
1969: महेंद्र  भारती सीपीआई
1972: राजपति देवी सीपीआई
1977: रुपलाल राय कांग्रेस
1980: ब्रज किशोर सिंह कांग्रेस
1985: सीताराम सिंह जनता पार्टी
1990: सीताराम सिंह जनता दल
1995: सीताराम सिंह जनता दल
2000: सीताराम सिंह राजद
2005(फरवरी): राणा रंधीर राजद
2005(अक्टूबर): शिवजी राय जेडीयू
2010: शिवजी राय जेडीयू
2015: राणा रंधीर भाजपा