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पटना हाईकोर्ट की पहल पर नगर निगम की हड़ताल वापस, कोर्ट का आदेश- कर्मियों के बकाया वेतन का भुगतान करें

पटना हाईकोर्ट की पहल पर पटना नगर निगम की हड़ताल वापस हो गई। शुक्रवार दोपहर बाद हड़ताल का नेतृत्व कर रही पटना नगर निगम कर्मचारी संयुक्त समन्वय समिति ने हड़ताल वापसी की घोषणा की। 

सुनवाई में कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कर्मियों के बकाये वेतन का भुगतान किये जाने के बारे में तत्काल कार्रवाई करें। कोर्ट ने यह भी कहा कि किसी भी हाल में सार्वजनिक संपत्ति का नुक़सान नहीं हो, यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए। निगम को जवाबी हलफनामा दायर करने का भी आदेश दिया। मामले पर अगली सुनवाई की तारीख 29 सितंबर तय की गई। 

हाईकोर्ट में अपर महाधिवक्ता अंजनी कुमार ने पटना नगर निगम के सफाई कर्मियों की हड़ताल के बारे में कोर्ट को जानकारी दी। उन्होंने कोर्ट को बताया कि हड़ताल के कारण शहर की स्थिति नारकीय हो गई है। कोविड काल में भी कर्मी हड़ताल पर चले गए हैं। शहर की गंदगी को साफ करना छोड़ दिए हैं। डोर टू डोर कचरा का उठाव नहीं होने से घरों में भी कचरा का अम्बर लग गया है। हर ओर गंदगी ही गंदगी नजर आ रही है। उनके ओर से दी गई जानकारी पर कोर्ट ने तुरंत कार्रवाई करते हुए प्रधान सचिव नगर विकास विभाग, नगर आयुक्त और समन्वय समिति के तीनों पदाधिकारी को नोटिस जारी किया। पटना नगर निगम कर्मचारी संयुक्त समन्वय समिति को हाजिर होने का आदेश दिया। 

हाईकोर्ट के आदेश पर समन्वय समिति की ओर से वरीय अधिवक्ता योगेश चंद्र वर्मा तथा अमित पांडेय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से हाजिर हुए और कोर्ट को बताया कि कानून के तहत हड़ताल पर जाने के पूर्व सूचना 14 दिन पहले ही सफाई कर्मियों ने नगर निगम को दे दी थी। साथ ही कहा था कि मांगें पूरी नहीं होने पर कर्मी हड़ताल पर चले जाएंगे। लेकिन नगर निगम ने कोई कार्रवाई नहीं की। वहीं, विभाग तथा निगम की ओर से कोर्ट को बताया गया कि कर्मियों की मांगों को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई की गई है। उनके बकाया वेतन का भुगतान किया गया है। फिर भी कर्मी हड़ताल पर चले गए हैं। 

बातचीत से निकालें समाधान
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजय करोल तथा न्यायमूर्ति एस कुमार की खंडपीठ ने मामले पर सुनवाई करते हुए कहा कि हड़ताल कानूनी है कि गैर कानूनी है कोर्ट इस पर अभी विचार नहीं करेगी। सबसे पहले शहर साफ सुथरा और स्वच्छ होना चाहिए। निगम के सभी हड़ताली कर्मी तुरंत हड़ताल समाप्त कर काम पर वापस लौटें।  कोर्ट ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से हो रही सुनवाई में भाग ले रहे सभी आला अधिकारियों को कहा कि वे हड़ताली कर्मचारी संगठन के साथ मिल बैठ बातचीत कर विवाद को समाप्त करने का प्रयास करें लेकिन किसी भी हाल में शहर में गन्दगी व कूड़ा का अंबार नहीं लगना चाहिए। कोरोना काल में शहर साफ सुथरा रहे यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए। 

दूसरे दिन भी नहीं उठाया कूड़ा
लगातार दूसरे दिन शुक्रवार की सुबह सफाईकर्मियों ने काम नहीं किया। निगम के सभी अंचलों में करीब आठ हजार सफाई कर्मी अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए थे। सब्जी मंडियों, बस स्टैंड, ऑटो स्टैंड, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों सहित घरों में कचरा का अंबार लग गया। हड़ताल के कारण पहले दिन ही हजारों मीट्रिक टन कूड़ा का उठाव नहीं हो सका। 

ये हैं प्रमुख मांगें :
निगम कर्मियों की प्रमुख मांगों में दैनिक मजदूरों का नियमित करना, दैनिक मजदूरों का न्यूनतम वेतन, निगम के प्रभारी कर्मियों का उसी पद पर समायोजन, आउटसोर्स कंपनियों के माध्यम से हो रहे निगम खजाने की लूट बंद हो एवं आउटसोर्स कर्मियों को श्रम कानूनों के अंतर्गत सभी सुविधाएं मुहैया हो, अनुकंपा पर बहाली शीघ्र प्रारंभ हो, सेवानिवृत्ति के समय ही भुगतान हो, निगम कर्मियों के पूर्व से चले आ रहे संपूर्ण बकाया का भुगतान हो, दैनिक मजदूरों के भविष्य निधि का अद्यतन हिसाब हो, ईएसआई की सुविधा अविलंब प्रारंभ हो, दैनिक मजदूरों की वरीयता सूची अविलंब प्रकाशित हो एवं कोविड-19 से संबंधित प्रोत्साहन राशि कम से कम 10000 रुपये सभी निगम कर्मियों को भुगतान किया जाए आदि है।

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