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नई शिक्षा नीति पर क्या राय है सीएम हेमंत सोरेन का, आप भी जानें

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में नई शिक्षा नीति पर सोमवार को वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के माध्यम से हुई चर्चा में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि इस नीति का पूरे देश को इंतजार था, लेकिन इसका वर्तमान स्वरूप स्वीकार्य नहीं है। इसमें आमूल-चूल परिवर्तन जरूरी है। इसके क्रियान्वयन में राज्यों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी, लेकिन इस नीति को बनाने में राज्यों के साथ शिक्षाविद, छात्रों और विशेषज्ञों से राय नहीं ली गई। 

सीएम ने नई शिक्षा नीति पर कई सवाल खड़े किए। उन्होंने गरीब, आदिवासी, दलित, पिछड़े, किसान और मजदूर परिवारों के बच्चों के लिए सुलभ शिक्षा पर संदेह जताया। सीएम ने कहा कि नई नीति से शिक्षा के क्षेत्र में निजीकरण और व्यापारीकरण को बढ़ावा मिलने की आशंका है। कहा कि कहीं नई शिक्षा नीति सामाजिक और आर्थिक विषमता को और न बढ़ा दे। सोरेन ने कहा कि आजादी के बाद यह सिर्फ तीसरा मौका है, जब शिक्षा नीति पर चर्चा हो रही है। उन्होंने इस पहल के लिए केंद्र सरकार को बधाई दी। कहा कि यह नीति अगले 30-35 वर्षों के लिए होगी। ऐसे में इस पर बोलने के लिए केवल तीन मिनट का समय नाकाफी है। इस मौके पर मुख्य सचिव सुखदेव सिंह, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव राजीव अरुण एक्का और शिक्षा सचिव राहुल शर्मा उपस्थित रहे।

निजीकरण-व्यापारीकरण को बढ़ावा मिलेगा : मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अवसर की समानता के मौलिक अधिकार पर केंद्रित रहकर शिक्षा नीति बनाने पर जोर दिया। कहा कि निजीकरण और व्यापारीकरण को बढ़ावा देने से एक बड़े वर्ग आदिवासी, दलित, पिछड़े, गरीब, किसान-मजदूर वर्ग के साथ अन्याय होगा। इस वर्ग के लोग सफलता की सीढ़ी चढ़कर आगे बढ़ने का प्रयास कर रहे हैं। इन्हें नजरअंदाज करने से उनसे सीढ़ी छीनने जैसा होगा। देश में उच्च शिक्षा हमेशा से अधिक नियंत्रित और कम वित्त पोषित रही है। विश्वविद्यालयों को समेकित तरीके से आगे बढ़ने के लिए, उन्हें नियंत्रित करने की बजाय स्वायत्तता देना अधिक जरूरी है।  

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