तेजस्वी ने कहा, तथ्यों के साथ सीएम नीतीश से खुली बहस को तैयार हूं

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नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कहा है कि वह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से खुली बहस को तैयार हैं। सीएम कहते हैं कि मै बिना ज्ञान के बोलता हूं तो तथ्यों के साथ बहस करने में हर्ज क्या है। सरकार शब्दों की बाजीगरी करती है। सरकार मानव दिवस नहीं बताए कितने लोगों को रोजगार दे रही है। उन्हें बीस साल पहले की कोर्ट की टिप्पणी याद है लेकिन एक वर्ष पूर्व सुप्रीम कोर्ट ने बालिका गृह कांड को लेकर क्या-क्या कहा था वह भुल गए।

नेता प्रतिपक्ष ने जदयू के वर्चुअल रैली से पहले दस सवालों की फेहरिस्त जारी की थी। रैली खत्म होने के बाद सोमवार को राबड़ी आवास पर प्रेस वार्ता में कहा कि मेरे किसी भी सवाल का जवाब नहीं दिया गया। 

उन्होंने कहा कि छह माह बाद सरकार कह रही है कि कोराना जांच के लिए मशीन लाएंगे। अब तक तो सरकार आंकड़ों का फर्जीवाड़ा कर ही लोगों को गुमराह करती रही। दावा है कि क्वरांटीन केन्द्रों में एक व्यक्ति पर पांच हजार रुपये खर्च हो रहे हैं। मेरा दावा है कि कोई बता दे कि सरकार यह सच बोल रही है। सारा पैसा भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया। अगर राजद का 15 वर्ष का जंगलराज था तो क्यों 2015 में जदयू ने गठबंधन क्यू किया।

इसके पहले सुबह में नेता प्रतिपक्ष ने सवाल किया था कि सरकार बताए कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा घोषित 1.65 लाख करोड़ के पैकेज का कितनी राशि ख़र्च हुई और कहां हुई। 15 वर्षों में रोज़गार क्यों नहीं दिया, बिहार में उद्योग-धंधे क्यों नहीं लगा और बिहार में नियमित बहाली क्यों नहीं की गई। बेरोज़गारी दर देश में सबसे अधिक 46.6 प्रतिशत क्यों है।  नीति आयोग के सारे सूचकांकों पर बिहार साल दर साल क्यों पिछड़ता चला गया। नीति आयोग की रिपोर्ट अनुसार शिक्षा, स्वास्थ्य व सतत विकास सूचकांक में यह राज्य अंतिम पायदान पर कैसे पहुंचा।