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तस्करी के शिकार 66 बच्चों को झारखंड लौटने का इंतजार, जानें कहां और किसी जिले के हैं ये बच्चे

झारखंड की नाबालिग लड़कियां महानगरों में शोषण का शिकार हो रही हैं। खूंटी से तस्करी की शिकार नाबालिग के साथ लगातार छह साल तक दिल्ली में गैंगरेप के मामले सामने आने के बाद मानव तस्करी को लेकर हो रहे उपायों पर सवाल उठ रहे हैं। राज्य पुलिस की सीआईडी के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2015 से लेकर अबतक 490 मामले राज्य के एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट थानों में दर्ज हुई हैं। इन मामलों में अबतक 281 मामलों में चार्जशीट दायर हुआ है, जबकि 84 मामले बंद हो चुके हैं, वहीं 125 केस अब तक पेंडिंग हैं। 

रेक्स्यू के बाद तस्करी के 66 शिकार नहीं लाए जा सके झारखंड : साल 2020 में खूंटी, लोहरदगा, गुमला, साहिबगंज, पाकुड़ समेत अन्य जिलों के 72 लोगों को दिल्ली के अलग अलग इलाकों से रेस्क्यू कर वहां के अलग-अलग बाल गृहों में रखा गया है। आंकड़ों के मुताबिक, 66 लोगों को वापस झारखंड भेजे जाने के योग्य पाया गया है। लेकिन अबतक सिर्फ पांच लोगों के ही घर वापसी की प्रक्रिया हो पायी है। वहीं एक तस्करी की शिकार पीड़ित जिसकी उम्र 18 साल से अधिक है, वह राज्य में वापस नहीं आना चाहती। 

कितने ट्रैफिकर हुए गिरफ्तार : राज्य की एएचटीयू थाने ने पन्नालाल सरीखे बड़े तस्करों को गिरफ्तार किया है। अबतक कुल 300 पुरुष व 139 महिला तस्कर पुलिस के हत्थे चढ़े हैं। जबकि नाबालिगों की रेस्क्यू के आंकड़े काफी कम हैं। पुलिसिया आंकड़ों के मुताबिक, अबतक कुल 716 लोगों को रेस्क्यू किया गया है, जिसमें 585 नाबालिग या महिलाएं शामिल हैं।
 
प्राइवेट वाहनों से हो रही तस्करी : बाल अधिकारी कार्यकर्ता व खूंटी सीडब्ल्यूसी के सदस्य बैद्यनाथ कुमार के मुताबिक, लॉकडाउन में प्राइवेट गाड़ी से प्लेसमेंट एजेंसियां तस्करी करवा रहीं। स्कूल बंद होने से बच्चे गांवों में असुरक्षित हैं। सिंगल पैरेंटिंग या शराब के लत के कारण दलाल आसानी से बच्चों के परिजनों को फांस रहे। 

प्लेसमेंट एजेंसियों के जरिए फल-फूल रहा धंधा : दिल्ली के पंजाबीबाग, शकरपुर इलाके में काम करने वाली कई प्लेसमेंट एजेंसियों के जरिए मानव तस्करी का धंधा फल फूल रहा है। राज्य सीआईडी ने दिल्ली में खोली गई 200 से अधिक एजेंसियों को चिन्हित किया था, जो मानव तस्करी में संलिप्तत थी। झारखंड के मानव तस्करों के तौर पर चिन्हित बाबा वामदेव, पन्नालाल, रोहित मुनि, प्रभा मुनि समेत अन्य लोगों के द्वारा भी प्लेसमेंट एजेंसी चलाने की बात सामने आयी थी। राज्य के अलग-अलग हिस्सों से नाबालिगों को दिल्ली ले जाकर इन प्लेसमेंट एजेंसी के जरिए एनसीआर में नाबालिगों को घरेलू नौकरानी के तौर पर बेचा जाता है। महीने की सैलरी भी इन प्लेसमेंट एजेंसियों से जुड़े लोग ही अक्सर रख लेते हैं। 

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