झारखंड : लॉकडाउन में काम छूटा तो तीन युवकों ने शुरू कर दी साइबर ठगी

cyber fraud

लॉकडाउन में काम छिना तो गांव लौटकर तीन युवकों ने साइबर अपराध का रास्ता पकड़ लिया। साइबर ठगी से दो माह में लाखों रुपये जुटाए लेकिन जल्द ही पुलिस के हत्थे चढ़ गए। जामताड़ा के करमाटांड़ निवासी इन तीनों युवकों में से एक मुजाहिद अंसारी के बैंक खाते से सिर्फ दो महीने में 12 लाख रुपए के लेनदेन के साक्ष्य मिले हैं। पुलिस अन्य दो आरोपियों के खातों की भी जांच कर रही है। लॉकडाउन से पहले तीनों महाराष्ट्र के पुणे में भवन निर्माण में दिहाड़ी मजदूर थे और महीने में आठ से 10 हजार रुपए कमा पा रहे थे।

16 अगस्त को गोविंदपुर पुलिस सड़क पर झपट्टामार गिरोह के सदस्यों की तलाश में थी। इसी दौरान तीनों आरोपियों इरशाद अंसारी, मुजाहिद अंसारी और कलीमुद्दीन अंसारी को गोविंदपुर में एक बैंक की एटीएम में कई बार आते-जाते देखा गया। उनकी गतिविधि संदिग्ध लगी तो पुलिस ने तीनों को पकड़ कर पूछताछ शुरू की। उनके पास से एक लाख 17 हजार रुपए नगद और पांच एटीएम कार्ड मिले। पुलिस ने तीनों को साइबर पुलिस के सुपुर्द कर दिया। पूछताछ में तीनों ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान घर लौटने पर उनके पास कोई काम नहीं था। बेरोजगार थे इसलिए जामताड़ा के साइबर ठग गिरोह से जुड़ गए।

इनके खातों की जांच के दौरान पता चला है कि सिर्फ मुजाहिद के खाते से पिछले दो माह में 12 लाख रुपए ट्रांसफर हुए हैं। पुलिस इरशाद और कलीमुद्दीन के खातों को भी खंगाल रही है। तीनों के बैंक खाते पुणे के अलग-अलग बैंक शाखाओं में है। मजदूर से साइबर ठग बने तीनों आरोपियों ने बताया कि जामताड़ा के साइबर ठगों से मिल कर वे लोग लिंक भेज कर या एटीएम कार्ड का विवरण पूछ कर रुपये खातों में ट्रांसफर करते थे। जामताड़ा के बजाय ये लोग दिनभर धनबाद की अलग-अलग एटीएम से रुपए की निकासी करते थे और करमाटांड़ लौट जाते थे। इस काम में दिल्ली के एक एक्सपर्ट की भी मदद ली जा रही थी। रकम निकासी के बाद गिरोह के अन्य सदस्यों के साथ मिलकर बांटते थे।

आरोपियों के खातों की जांच हो रही है। बैंकों से संपर्क कर खातों का स्टेटमेंट मांगा गया है। एक आरोपी के खाते से 12 लाख रुपए का ट्रांजेक्शन मिला है। – सुमित सौरभ लकड़ा, डीएसपी, साइबर