झारखंड में चार गुना बढ़ी कोरोना की जांच, अब सैंपल की जांच इस तरह होगी

झारखंड में चार गुना बढ़ी कोरोना की जांच, अब सैंपल की जांच इस तरह होगी

पिछले एक माह में झारखंड में कोरोना जांच की क्षमता चार गुना से अधिक हो गई है। सूबे में जुलाई के आखिरी सप्ताह (27 जुलाई से 2 अगस्त) में जहां औसतन प्रतिदिन 10563 सैंपलों की जांच हो पाती थी वहीं अगस्त के आखिरी सप्ताह (27 अगस्त से 2 सितंबर) में 4.49 गुना बढ़ कर यह प्रतिदिन औसतन 47450 हो गयी है। लेकिन दूसरी तरफ जिस हिसाब से संदिग्धों की जांच बढ़ी है, उसी हिसाब से सैंपल कलेक्शन भी बढ़ा है। 

   इसका नतीजा यह हुआ है कि जितने सैंपल का कलेक्शन हो रहा है उन सभी की जांच नहीं हो पा रही है। सैंपलों की प्रतीक्षा सूची ( पेंडेंसी) कमोबेश ज्यों की त्यों बनी हुई है। इस समस्या का समाधान करने के लिए राज्य सरकार ने जिलों में जमा किये जा रहे  सैंपलों की आरटीपीसीआर जांच निजी लैबों से कराने का निर्णय लिया है। इसके तहत सरकारी स्तर पर जिन सैंपलों की जांच नहीं हो पाएगी या जांच की क्षमता से अधिक जो सैंपल जमा किए जाएंगे उन्हें निजी लैबों को देकर उनकी जांच कराई जाएगी। उसके एवज में सरकार निजी लैबों को भुगतान करेगी। इससे राज्य में लगतार बढ़ रही प्रतीक्षा सूची को कम किया जा सकेगा।

 3.38 लाख सैंपलों की जांच: पिछले एक सप्ताह (27 अगस्त से 2 सितंबर) में राज्य भर में मरीजों के 343762 सैंपल कलेक्ट किए गए। राज्य के विभिन्न जांच केन्द्रों पर इनमें से 338642 सैंपलों की जांच की गई। मतलब यह कि आज की तारीख में राज्य भर में 12479 सैंपलों की जांच प्रतीक्षा सूची में पड़ी है। दूसरी तरफ 27 अगस्त को राज्य भर में प्रतीक्षा सूची में पड़े सैंपलों की संख्या जहां 10415 थी वहीं दो अगस्त को यह 14187 हो गई थी। 

9.99 लाख लोगों की हो चुकी है सैंपलिंग : राज्य में अब तक कोरोना जांच के लिए 9 लाख 99 हजार 243 लोगों की सैंपलिंग की जा चुकी है। इसमें से 9 लाख 86 हजार 764 लोगों की जांच की जा चुकी है। 12479 सैंपलों की जांच पेंडिंग है। राज्य में जांच की क्षमता का अंदाजा इन आंकड़ों से सहज ही लगाया जा सकता है। पिछले पांच माह (मार्च से जुलाई) में राज्य भर में जितने सैंपलों की जांच हुई उससे दोगुना से अधिक सैंपलो की जांच केवल अगस्त में हुई है। 

निजी लैबों के चयन की प्रक्रिया शुरू
सरकारी स्तर पर  जिलों में जमा किये जाने वाले अतिरिक्त सैंपलों की जांच के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने मान्यता प्राप्त लैबों के चयन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अभियान निदेशक रविशंकर शुक्ला ने बताया कि इसके लिए टेंडर निकाला गया है। एक सैंपल की आरटीपीसीआर जांच के लिए सरकार ने 1350 रुपए दर निर्धारित की है। लेकिन सरकार की मंशा है कि यह दर और कम की जाए। उन्होंने कहा कि टेंडर प्रक्रिया में जो लैब सबसे कम दर पर आरटीपीसीआर जांच के लिए तैयार होंगे  उनसे यह जांच कराई जाएगी।