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झारखंड : मनरेगाकर्मियों ने मंत्री से वार्ता के बाद 46 दिन पुरानी हड़ताल तोड़ी, तो इस लिए मान गए

झारखंड में मनरेगाकर्मियों की हड़ताल 46 दिन बाद समाप्त हो गई है। ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम के साथ वार्ता के बाद  मनरेगाकर्मी हड़ताल तोड़ने के लिए राजी हुए। मंत्री ने मनरेगाकर्मियों को कर्मचारी भविष्य निधि(ईपीएफ) का लाभ देने की मांग मान ली है। इसके तहत मनरेगाकर्मियों के मानदेय की 25 फीसदी राशि हर महीने कर्मचारी भविष्य निधि खाते में जमा होगी। इसमें से 12 फीसदी शि कर्मचारियों के हिस्से से काटी जाएगी तथा शेष सरकार देगी।

काम के दौरान मनरेगाकर्मियों की मौत होने पर सरकार पांच लाख तक की सहायता राशि देगी। वहीं काम के दौरान घायल होने पर 25 हजार रुपए इलाज के लिए मिलेगा। इसी तरह काम की अवधि में घायल होने पर भी सरकार इलाज के लिए अधिकतम 50 हजार रुपए सहायता देगी। ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम ने कहा कि राज्य सरकार ने इस बारे में फैसला ले लिया है। इसे जल्द से जल्द लागू किया जाएगा।

बर्खास्तगी के खिलाफ कर सकेंगे अपील : बर्खास्त होने वाले मनरेगाकर्मियों को भी इससे निजात मिलेगी। मंत्री ने उन्हें इसके खिलाफ अपील का अधिकार देने के राज्य सरकार के फैसले की भी जानकारी दी। मनरेगाकर्मियों को सेवामुक्ति का आदेश मिलने के एक महीने के भीतर प्रमंडलीय आयुक्त के सामने अपील का अधिकार होगा। वहीं अधिकारियों को भी सेवामुक्ति का आदेश निकालने से पहले स्पष्टीकरण पूछने के प्रावधान का पालन करना होगा।

मनरेगाकर्मियों का बड़ा गुट सहमत नहीं : ग्रामीण विकास विभाग की ओर से भले ही मनरेगाकर्मियों का हड़ताल समाप्त होने की घोषणा की गई है, परंतु मनरेगाकर्मियों का बड़ा धड़ा इससे संतुष्ट नहीं है। ग्रामीण विकास मंत्री के साथ वार्ता में मनरेगा कर्मचारी संघ के प्रमुख नेता मौजूद नहीं थे। इस बारे में जब प्रदेश अध्यक्ष अनिरुद्ध पांडेय, सचिव जॉन बागे और संगठन सचिव इम्तियाज का पक्ष जानने के लिए किया गया लेकिन उनलोगों ने कॉल रिसीव नहीं किया।

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