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झारखंड : नई विधानसभा और हाईकोर्ट भवन पर 113 करोड़ रुपये का जुर्माना, जानें क्यों हुई कार्रवाई

झारखंड में पर्यावरण नियमों की अनदेखी करके बने रही इमारतों पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की पूर्वी बेंच कोलकाता ने सख्त रूख बरकरार रखा है। झारखंड विधानसभा भवन और हाई कोर्ट के नए भवन का निर्माण में पर्यावरण प्रोटेक्शन नोटिफिकेशन 2006 का उल्लंघन (पर्यावरण स्वीकृति के बिना निर्माण) मिलने पर 113 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है।  सूबे के 19 अन्य भवनों के निर्माण को भी पर्यावरण नुकसान के मद्देनजर चिन्हित किया गया है। इसमें रांची की स्मार्ट सिटी भी शामिल है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि मीडिया से ही जानकारी मिली है। विस्तृत ऑर्डर आने के बाद कार्रवाई की जाएगी। भवन या अन्य निर्माण नियमों के दायरे में रहकर ही होता है। सरकार गलत कार्यों को प्रोत्साहित नहीं करती। 

याचिकाकर्ता पर्यावरणविद आरके सिंह ने बताया कि एनजीटी ने बुधवार को सुनवाई निष्पादित करते हुए पिछली सुनवाई के दौरान लगाए गए जुर्माना को पर्यावरण को हुए नुकसान के कारण बरकरार रखा है। सिंह ने बताया कि ट्रिब्यूनल ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से पर्यावरण नुकसान की भरपाई के लिए जुर्माने की अनुशंसा को भी स्वीकार किया है। उन्होंने बताया कि विस्तृत ऑर्डर आने के बाद यह मालूम चलेगा कि विधानसभा भवन पर लगे 47 करोड़ और हाई कोर्ट के नए भवन पर करीब 66 करोड़ रुपये का जुर्माना चुकायेगा कौन। सीपीसीबी ने मुआवजे की राशि राज्य सरकार द्वारा भुगतान किए जाने की बात कही थी। एनजीटी ने राज्य सरकार से कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है। केस निष्पादित हो गया है, लेकिन बंद नहीं। 

आपराधिक मुकदमा और निर्माण पर रोक : विधायक सरयू राय ने कहा कि पर्यावरण को हुई क्षति को मद्देनजर रखते हुए इनवॉयरमेंट प्रोटेक्शन एक्ट 1986 के तहत क्रिमिनल केस दर्ज होगा। निर्माणाधीन भवनों के निर्माण के पर रोक रहेगी। इसलिए उन्होंने पीएम मोदी से विधानसभा भवन के उद्घाटन नहीं करने का आग्रह किया था। उन्होंने सवाल किया है कि जुर्माना संवेदक, सरकारी अफसर या जनता के कर बने राजकोष से दिया जाएगा। 

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