झारखंड : कोरोना मरीजों का शव ले जाने के लिए एंबुलेंस चालक नहीं कर सकेंगे मनमानी, सरकार सख्त, किराया जान लें

झारखंड : कोरोना मरीजों का शव ले जाने के लिए एंबुलेंस चालक नहीं कर सकेंगे मनमानी, सरकार सख्त, किराया जान लें

कोविड मरीजों की मौत के बाद शव ले जाने को लेकर निजी एंबुलेंस चालकों की मनमाना किराया वसूली पर सरकार ने अंकुश लगा दिया है।  स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव डॉ नितिन कुलकर्णी ने इस बाबत आदेश जारी कर एंबुलेंसों के लिए किराया निर्धारित कर दिया है। साथ ही कोविड मरीजों की मौत के बाद उसके अंतिम संस्कार को लेकर भी दिशा निर्देश दिए हैं। 

सोमवार को आपके अपने अखबार हिन्दुस्तान ने निजी एंबुलेंस द्वारा की जा रही मनमाना वसूली को लेकर ‘निजी अस्पतालों पर अंकुश पर एंबुलेंस चालक बेलगाम’ शीर्षक से एक खबर प्रकाशित किया था। इसमें बताया गया था कि किस प्रकार निजी एंबुलेंस चालक कोरोना मरीज या कोरोना मरीज के शव को ले जाने के लिए 4-5 किलोमीटर का 10-12 हजार रुपए की वसूली कर रहे हैं। खबर पर संज्ञान लेते हुए प्रधान सचिव ने यह कार्रवाई की है।

चार दिनों तक निशुल्क रखेंगे शव : प्रधान सचिव ने अपने आदेश में कहा है कि अस्पतालों में कोरोना मरीजों की मौत के बाद परिजन यदि शव नहीं ले जा पा रहे हैं तो चार दिनों तक शव को निशुल्क रखा जाएगा। उसके बाद प्रतिदिन 500 रुपए के हिसाब से शुल्क लिया जा सकेगा। यदि काफी प्रयास के बाद भी परिजन मोक्ष वाहन/ शव वाहन की व्यवस्था नहीं कर पाते हैं तो संबंधित अस्पताल शव ले जाने के लिए समुचित वाहन (इमरजेंसी एंबुलेंस को छोड़कर) की व्यवस्था करने में सहायता करेगा। इसके किराया का भुगतान निर्धारित दर पर ही किया जाएगा। यदि किसी मरीज की मौत के बाद परिजन शव पर दावा नहीं करते हैं तो जिला प्रशासन 24 घंटे के अंदर शव का अंतिम संस्कार करेगा। शव वाहन के लिए परिजन मेडिकल कॉलेज के सुपरिटेंडेट या जिले के सिविल सर्जन से संपर्क कर सकते हैं। मेडिकल कॉलेज और सदर अस्पतालों में मोक्ष वाहन/ शव वाहन उपलब्ध कराये गये हैं। प्रधान सचिव ने सभी सिविल सर्जनों को इसे सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया है। आदेश की अवहेलना करने वालों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।

क्या होगा शुल्क : शव वाहन के लिए सर्विस चार्ज रुप में 500 रुपए के अलावा पीपीई किट का 700(परिजन यदि नया पीपीई किट देते हैं तो यह चार्ज नहीं), वाहन सेनेटाईजेशन का 200, पहले 10 किलोमीटर के लिए 500, 10 किलोमीटर के बाद प्रति किलोमीटर 9 रुपए के हिसाब से किराया का भुगतान करना होगा। किलोमीटर का निर्धारण जाने- आने की दूरी का होगा।