झारखंड के 1200 सरकारी स्कूल ज्ञान के साथ आम-लीची के पौधे भी बांटेंगे

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झारखंड के 1200 सरकारी स्कूल ज्ञान के साथ आम-लीची के पौधे भी बांटेंगे। लोगों को सखुआ जैसी इमारती लकड़ियों के पौधे भी यहां से मिलेंगे। छठी-आठवीं कक्षा बच्चे अपने स्थानीय समुदाय के विकास के लिए ये पौधे तैयार करेंगे। झारखंड के वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग तथा एससी-एसटी, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग को इस आशय का पत्र भेजा है।

वन विभाग ने दोनों विभागों से परिसर में नर्सरी स्थापित करने के लिए हर जिले से 50 विद्यालयों की सूची मांगी है। चुने गए विद्यालयों में चरणवार नर्सरी स्थापित की जाएगी। पहले चरण में प्रखंड मुख्यालय और शहरी विद्यालयों में ही नर्सरी स्थापित की जाएगी। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से इस बारे में डिटेल गाइडलाइन आने का भी इंतजार किया जा रहा है। झारखंड के वन विभाग की योजना फिलहाल विद्यालयों में स्थापित होने वाली नर्सरी में फलदार और फूल वाले पौधों को तैयार करने की है। इसमें बच्चों की इच्छा वाले पौधों को प्राथमिकता दी जाएगी।

चुने स्कूलों में माली की होगी नियुक्ति : नर्सरी स्थापित करने के लिए चुने गए सभी विद्यालयों में एक-एक माली की नियुक्ति होगी। इन मालियों के मानदेय का पैसा भारत सरकार देगी। ये माली छठी-आठवीं के विद्यार्थियों को प्रशिक्षण भी देंगे। बच्चों को हर पौधे की खासियत, उनके अनुकूल वातावरण और उनके विकास के लिए बरते जाने वाले एहतियात के बारे में भी जानकारी देंगे। इससे स्कूली बच्चे सामाजिक वानिकी के तौर-तरीकों से भी अवगत हो सकेंगे। उनमें पर्यावरण के प्रति जागरूकता भी फैलेगी।

अपने नाम से लगा सकेंगे पौधे : स्कूलों में नर्सरी स्थापित करने की योजना के तहत छठी-आठवीं के बच्चे अपने नाम से पौधारोपण कर उसे वृक्ष के रूप में विकसित होने तक देखभाल भी कर सकते हैं। इसके लिए किसी भी सार्वजनिक स्थल को चुना जा सकता है। विद्यालय से पढ़ाई पूरी करने के बाद भी बच्चे उन पेड़ों की घेरेबंदी आदि कर खुद को जोड़े रख सकते हैं। सार्वजनिक स्थलों के लिए पीपल, वट आदि छायादार पेड़ों का चुनाव भी किया जा सकता है। विद्यालय परिसर में पर्याप्त जगह होने पर बच्चे वहां भी पौधे लगा सकते हैं। विद्यालय के शिक्षक बच्चों के पाठ्य विषय-वस्तु से नर्सरी के पौधों को जोड़कर भी विद्यार्थियों का ज्ञानवर्द्धन कर सकते हैं।

वन एवं पर्यावरण सचिव एपी सिंह ने कहा कि स्कूली शिक्षा विभाग एवं कल्याण विभाग को हर जिले में 50 विद्यालयों का चयन करने के लिए पत्र लिखा गया है। पहले रण में शहरी विद्यालयों और प्रखंड मुख्यालयों वाले विद्यालयों में नर्सरी स्थापित की जाएगी।