झारखंड के गांवों के स्कूल, अस्पताल और बाजार तक पहुंचना होगा आसान, जानें कैसे

झारखंड के गांवों के स्कूल, अस्पताल और बाजार तक पहुंचना होगा आसान, जानें कैसे

झारखंड के गांवों के स्कूल, अस्पताल और बाजार तक पहुंचना आसान होगा। इन जगहों को प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के फेज-3 के जरिए जोड़ा जाएगा। जिन गांवों में इन जगहों पर पहुंचने के लिए पक्की सड़क नहीं बनी है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर बनाया जाएगा। इसके लिए कागजी कार्रवाई शुरू हो गई है। जल्द ही इन स्थानों पर निर्माण के लिए सड़कों को चिह्नित किया जाएगा। इसके बाद केंद्र से मंजूरी लेकर काम शुरू होगा।

ऑनलाइन होगी सारी व्यवस्था: ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों के मुताबिक इस बार व्यवस्था बदल गई है। इस बार अपने मन से किसी भी स्थान को नहीं चुना जा सकेगा। सारी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी।  क्षेत्र की प्राथमिकता के लिए अलग-अलग अंक तय किए गए हैं। किन जगहों के लिए संपर्क मार्ग नहीं है, कहां स्कूल, अस्पताल और बाजार आदि जगह गांव को एक-दूसरे के साथ नहीं जोड़ रहे हैं। इसके अलावा एक गांव से दूसरे गांव के बीच पड़ने वाली इन जगहों के बीच की स्थिति क्या है। इन सभी बातों के लिए अलग-अलग अंक निर्धारित हैं। अंकों के आधार पर प्राथमिकता तय होगी। सभी का आकलन करके ही स्थान का चुनाव होगा। 

जीआईएस मैपिंग और जीओ टैगिंग की जाएगी : अधिकारियों ने कहा कि राज्य के सभी ब्लॉक की जीआईएस मैपिंग होगी। इनके जरिए बिना सड़क संपर्क वाले अस्पताल, स्कूल और बाजारों को देखा जाएगा। इन जगहों का स्थल निरीक्षण कर फोटो लेकर जीओ टैगिंग की जाएगी। केंद्र और विभाग जब चाहे इन जगहों को देख सकेंगे। इसके बाद उन जगहों का चयन कर केंद्र द्वारा सड़क निर्माण की मंजूरी दी जाएगी। इसके लिए अधिकारियों ने कहा कि केंद्र ने प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना फेज-3 पर काम करने की मंजूरी दी है। यह कार्य वर्ष 2020-21 के लिए है। इसलिए सारी प्रक्रियाओं पर तेजी से काम चल रहा है।  

फेज एक में 25 हजार किलोमीटर बनी सड़क
प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना का फेज-1 और फेज दो समाप्त हो चुका है। फेज एक में जहां ग्रामीण क्षेत्र के नई सड़कों का निर्माण किया गया, वहीं, फेज-दो में निर्मित सड़कों का जीर्णोद्धार भी किए गए। अब इस वित्तीय वर्ष से फेज-3 शुरू किया गया है। ग्रामीण विकास के अधिकारियों के मुताबिक फेज एक में राज्य में लगभग 25,800 किमी सड़क का निर्माण हुआ है। जबकि फेज-2 में निर्माण और जीर्णोद्धार समेत 160553 किमी काम हुए। फेज एक व दो योजना की समय सीमा समाप्त होने के बाद भी अभी कुछ जगहों पर काम चल रहा है, जिसे केंद्र ने इस वित्तीय वर्ष में पूरा कर लेने का निर्देश दिया है। विभाग द्वारा फेज-1 और दो के बचे हुए कार्यों पर भी तेजी से काम किया जा रहा है। हाल ही में कई जिलों के गांव के लिए टेंडर निकाले गए हैं। योजना पर होने वाले खर्च का 60 फीसदी केंद्र और 40 फीसदी राज्य सरकार द्वारा किया जाता है। इस मद में अभी लगभग 1800 करोड़ रुपये बचे हुए हैं। राज्य सरकार द्वारा इस राशि का उपयोग कर बचे हुए कार्यों को पूरा कराया जाएगा।