झारखंड : आईटीआई में प्राचार्य और शिक्षकों के रिक्त पदों पर जानें हाईकोर्ट की टिप्पणी

झारखंड : आईटीआई में प्राचार्य और शिक्षकों के रिक्त पदों पर जानें हाईकोर्ट की टिप्पणी

राज्य के आईटीआई में प्राचार्य और शिक्षकों के रिक्त पदों पर वर्षों से नियुक्ति नहीं होने और नए भवनों का इस्तेमाल नहीं किए जाने पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जाहिर की। 

चीफ जस्टिस डॉ रवि रंजन और जस्टिस एसके द्विवेदी की अदालत ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा कि यदि सरकार ऐसे शिक्षण संस्थानों को चलाने में सक्षम नहीं है तो उसे निजी हाथों में क्यों नहीं सौंप देती। 

अदालत ने इस मामले में अगली सुनवाई 18 सितंबर को निर्धारित करते हुए श्रम विभाग के सचिव को अदालत में हाजिर होकर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। इस संबंध में डॉ भीम प्रभाकर ने जनहित याचिका दायर की है। इसमें कहा गया है कि राज्य सरकार ने प्राय: सभी जिलों में आईटीआई के नए भवनों का निर्माण किया है। इस पर करोड़ों खर्च हुए हैं, लेकिन इन संस्थानों में शिक्षक नहीं हैं। आधारभूत संरचना और अन्य सुविधाएं भी मौजूद नहीं है। शिक्षकों के नहीं रहने से छात्र नामांकन नहीं ले रहे हैं और भवन भी जर्जर होने लगे हैं। 

सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से बताया गया कि राज्य सरकार 59 आईटीआई का संचालन कर रही है। इन संस्थानों में प्राचार्यों के पद रिक्त हैं। 700 से अधिक इंस्ट्रक्टर के पद भी खाली हैं। इसके बाद अदालत ने नाराजगी जताई और श्रम विभाग के सचिव को 18 सितंबर को हाजिर होकर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।