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झारखंड : अल्पसंख्यक कॉलेज के शिक्षकों के पक्ष में फिर आया फैसला, जानें क्या है मामला


आदेश के बावजूद अल्पसंख्यक कॉलेज के शिक्षकों को पेंशन का लाभ नहीं देने पर झारखंड हाईकोर्ट ने नाराजगी जताते हुए सरकार पर बड़ा हर्जाना लगाया है। जस्टिस एचसी मिश्र और जस्टिस दीपक रौशन की अदालत ने सभी प्रार्थियों को हर्जाने के रूप में 50-50 हजार रुपये का भुगतान करने के साथ उन्हें बकाया पेंशन का भुगतान करने का आदेश दिया है। सरकार को अदालत के आदेश का पालन कर 27 नवंबर तक कोर्ट को जानकारी देने का भी निर्देश दिया गया है। इस संबंध में मंजूल शर्मा समेत करीब 90 लोगों ने याचिका दायर की थी। 

याचिका में कहा गया था कि सरकार ने 19.12.12 को एक आदेश जारी कर अल्पसंख्यक कॉलेज के शिक्षकों को इस तिथि के बाद वालों को ही पेंशन का लाभ देने का प्रावधान किया था। इस आदेश को कई शिक्षकों ने चुनौती दी थी और कहा था कि पेंशन का लाभ सभी को मिलना चाहिए। सरकार की नीति बदलने से उन्हें नुकसान हुआ है। एकलपीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए सरकार के आदेश को रद्द कर दिया था और सरकार को एक शुद्धि पत्र जारी कर सभी शिक्षकों को लाभ देने का आदेश जारी करने का आदेश दिया था। 

इसके बाद सरकार ने एकलपीठ के आदेश को चुनौती देते हुए खंडपीठ में अपील याचिका दायर की। खंडपीठ ने सुनवाई के बाद एकलपीठ के आदेश को सही बताया और पेंशन भुगतान करने का निर्देश दिया। सरकार की ओर से आदेश का पालन नहीं किए जाने पर प्रार्थियों ने अवमानना याचिका दायर की। इस बीच सरकार हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट चली गयी। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की याचिका खारिज कर दी और हाईकोर्ट के आदेश को सही बताया। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी सरकार ने पेंशन का भुगतान नहीं किया। 
शुक्रवार को हाईकोर्ट ने अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए नाराजगी जाहिर की और हर प्रार्थी को 50- 50 हजार अतिरिक्त राशि हर्जाने के तौर पर देने के साथ पेंशन भुगतान करने का निर्देश दिया। 
 

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