जोकीहाट विधानसभा सीट: अररिया जिले की इस सीट पर तस्लीमुद्दीन परिवार का रहा है दबदबा

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अररिया जिले की छह विधानसभा सीटों में से एक जोकीहाट का राजनीतिक परिदृश्य सबसे अलग रहा है। यहां का इतिहास बताता है कि जोकीहाट में किसी राजनीतिक दल विशेष का नहीं, बल्कि तस्लीमुद्दीन परिवार का करिश्मा चलता है।  

जोकीहाट विधानसभा क्षेत्र का गठन 1967 में हुआ और नजमुद्दीन पहले विधायक बने। इसके बाद 1969 के चुनाव में पहली बार तस्लीमुद्दीन परिवार का जो दबदबा बना, वह कमो.बेस आज तक कायम है। इस दौरान 14 चुनाव हुए, जिनमें केवल चार बार तस्लीमुद्दीन विरोधी खेमे की जीत हुई। बाकी सारे चुनाव में या तो तस्लीमुद्दीन या उनके बेटों ने ही जीत का परचम लहराया। यहां तक कि पूर्व केन्द्रीय गृह राज्यमंत्री व तत्कालीन सांसद तस्लीमुद्दीन के 2017 में निधन के बाद लोकसभा उपचुनाव में जहां उनके बेटे सरफराज आलम सांसद चुने गए तो विधानसभा उपचुनाव में उनके छोटे पुत्र मो.. शाहनवाज ने आरजेडी के टिकट पर जीत दर्ज की।

 वर्ष 1969 में हुए चुनाव के बाद से लेकर पिछले उपचुनाव तक के परिणाम बताते हैं कि विरोधियों की तमाम कोशिशों और एकजुटता के बावजूद तस्लीमुद्दीन परिवार के मजबूत किले को एक दो बार ही भेदने में सफलता मिली है। 1980 और 1990 के चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी मो.ईदुर रहमान ने जीत दर्ज की थी, जबकि वर्ष 2005 में दो बार हुए चुनाव में जदयू के मंजर आलम ने तस्लीमुद्दीन के पुत्र सरफराज आलम को शिकस्त देने में सफलता पाई थी। मगर  सरफराज आलम ने 2010 के चुनाव में मंजर आलम को पराजित कर इस सीट पर कब्जा जमा लिया था।

परिसीमन से भौगोलिक व जातीय समीकरण में बदलाव
 परिसीमन के बाद जोकीहाट विधानसभा में जहां प्रखंड की 27 पंचायतों के साथ-साथ पलासी प्रखंड की 12 पंचायतों को भी शामिल किया गया। इससे क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति और जातीय समीकरण में बदलाव आया। इसके बावजूद राजनीति की कमान उसी परिवार के हाथ में रही। जोकीहाट विधानसभा अब भी कमो.बेस मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र है। इसके अलावा मंडल व यादव जाति के मतदाता भी अच्छी संख्या में हैं।

साल दर साल बाढ़ से मचने वाली तबाही है समस्या
जोकीहाट विधानसभा क्षेत्र के एक बड़ी आबादी की समस्या साल दर साल बाढ़ से होने वाली तबाही है। परमान और बकरा नदी के बीच स्थित प्रखंड के दक्षिणी भाग की दर्जन भर पंचायत के लोग बाढ़ को लेकर परेशान रहते हैं। हाल के दिनों में उदा में बने स्क्रपाइल पुल के अचानक ध्वस्त हो जाने से प्रखंड दो हिस्सों में बंट गया। दक्षिणी भाग का संपर्क मुख्यालय से पूरी तरह भंग हो चुका।

साहित्यकारों ने भी दिलाई है खास पहचान
यूं तो राजनीतिक उथल-पुथल के लिए जोकीहाट हमेशा से सुर्खियों में बना रहा है, लेकिन जोकीहाट की धरती ने कई ऐसे नामचीन साहित्यकार दिये हैं, जिन्होंने देश दुनिया में नाम रोशन किया है। विद्याधर के लेखक शाह किफायतुल्लाह ने पुस्तक के अधिकतर अंश जोकीहाट में प्रवास के दौरान ही लिखे। साकिब नौमानी का शुमार उर्दू व फारसी के बेहतरीन शायरों में होता था। फिलवक्त साहित्य के क्षेत्र में देश दुनिया में अपनी विशेष पहचान बनाने हक्कानी अल कासमी भी जोकीहाट के मूल निवासी हैं। वहीं, हिंदी कथाकार राहबान अली राकेश, शायर व पेंटर दीन रजा अख्तर के अलावा नौमान कैसर व मो. मो.ईद भी साहित्य में सक्रिय योगदान दे रहे हैं। तारिक बिन साकिब नामवर कैलिग्राफर हैं।

निर्वाचित विधायक
1967- नजमुद्दीन- पीएसपी
1969- मो. तस्लीमुद्दीन- कांग्रेस
1972- मो. तस्लीमुद्दीन- निर्दलीय
1977- मो. तस्लीमुद्दीन- जनता पार्टी
1980- मो.ईदुर रहमान- कांग्रेस
1985- मो. तस्लीमुद्दीन-
1990- मो.ईदुर रहमान-
1995- मो. तस्लीमुद्दीन- समाजवादी पार्टी
2000- सरफराज आलम- राजद
2005- मंजर आलम- जदयू
2005- मंजर आलम- जदयू
2010- सरफराज आलम- जदयू
2015- सरफराज आलम- जदयू
2018- मो. शाहनवाज-राजद

कुल मतदाता- 28682
महिला मतदाता- 135107
पुरुष मतदाता- 151710
कुल मतदान केन्द्र -422
मूल मतदान केन्द्र- 271
सहायक मतदान केन्द्र – 151