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छोटका मोदी से लेकर ऊ नीतीश और तेजस्वी तक… सब एनही से न पूछकर आगे चलता है

आरा में चाय की यह दुकान अपने नाम से ही ध्यान खींच लेती है। टाउन स्कूल के पास, मुख्य मार्ग पर ही है, ‘दीनदयाल उपाध्याय चाय प्रयोगशाला’। इस नाम ने ही गाड़ी रोकने को मजबूर कर दिया, लगा दुकान का नाम ही ऐसा है तो यहां की चर्चाएं भी जरूर कुछ स्पेशल होंगी। आरा अभी-अभी चुनाव से मुक्त हुआ है, सो रुचि भी ज्यादा थी। आरा क्या, पूरे भोजपुर की यह खासियत है कि अपनी चर्चाओं से किसी को भी बरबस रोक सकता है।

चर्चा चुनाव की ही चल रही थी, सो मैंने भी चाय के आर्डर के साथ चुनाव का हालचाल पूछ लिया। बगल में बैठे सज्जन कुछ इस अंदाज में बोले, जैसे मौसम की भविष्यवाणी कर रहे हों- ‘ई बेर मौसम बदले के बा। बहुत दिन बाद हवा बदल रही है। इधर की हवा अब वैशाली-मगध की ओर चली गई है। पूरे बिहार का मौसम बदलने वाला है।’

यह भोलू की दूकान है, अब तक की बातचीत से पता चल चुका था। भोलू ने बातचीत में हस्तक्षेप किया, ‘आप त ऐसे बता रहे हैं पांडे जी, जैसे सब आपे से पूछ के वोट डाला है’, और एक हंसी सी फूट गई। तब तक किसी ने कहा- ‘लागत बा की एहिजा कोरोना नइखे, एहिजा कौनो कोरोना फरोना के असर नइखे, चुनौवा में भी न दिखात’।

किसी ने गुस्से में जोड़ा- ‘सब दिखाई पड़ेगा, बस चुनाव निपटने दीजिये। जो भी सरकार आएगा, सबसे पाहिले कोरोना से ही जूझना पड़ेगा। हम सब जिम्मेदार हैं इसके लिए’।

काहे- हम सब काहे जिम्मेदार हैं। ई बात त चुनाव करावे वाले सब न सोचें। सब तो कह रहा था कि अबे चुनाव न होय के चाही और ई बताइये, अभी तक एको बार सुने हैं कि चुनाव आयोग इस आधार पर किसी पार्टी को नोटिस दिया है कि भीड़ ज्यादे है, कोई मास्क नही लगाये हैं। तभी किसी ने हस्तक्षेप किया- ‘अरे मरदे, आप त सीरियस हो गये। कोरोना-फोरोना अभी छोड़िये, ई बताइए सरकार किसकी बन रही है। आप त करीब से देखें हैं न सब’।

तभी दूसरे सज्जन ने कहा- ‘अरे मरदे, ई हमनी आपन शौक से वोट थोड़े करतानी जा। ई त सरकारे नु चुनाव करवा ता। एकरा में हमनी के कौन दोष। ई सारी व्यवस्था त सरकारे के न करेक चाहत रहा’।

तब तक इस चर्चा में दो युवाओं ने अचानक एंट्री ली। इनका ज्ञान चुनाव और आरा जिला को लेकर काफी ठीक-ठाक लग रहा था। एक ने कहा, ‘चचा इस त ठीक है, लेकिन अबकी लग रहा है नु कि भाजपा के अमरेंदर बबवा बाजी मार लेंगे। अबकी उनका लहर चल रहा है। मियां जी के लेके खूब खिसियाईल है लोग’। तब तक दूसरा युवा बोल उठा- ‘भले आरा शहर में भाजपा निकल जाई, लेकिन सन्देश में त अरुनवे निकली। भागल बा लेकिन आपन मेहरारू के खड़ा कर देले बा। सुननी ह कि आपन भसुर उ पटक दिही’।

आरा जिले की सातों सीटों की समीक्षा पूरी होती कि इससे पहले ही एक गाड़ी आकर रुकी। इससे उतरे लोग खुद ही बता दे रहे थे कि भोजपुर के तो नहीं हैं। चाय का आर्डर देकर बैठे ही थे कि एक बुजुर्ग में पूछ दिया कहां से आ रहे हैं। बातों से पता चला कि बलिया के लोग हैं और पटना जा रहे हैं। इतना तो साफ ही हो गया था कि वहां से किसी के चुनाव अभियान का हिस्सा बनने के लिए आगे जाना है, और बिना ज्यादा बतियाये ये लोग आगे निकल गये।

चुनाव से लेकर गर्मी-बारिश तक का मिजाज पहले ही भांप लेने वाले स्वयम्भू मौसम विज्ञानी पांडे जी बोले- ‘पक्का जान लीजिए कि भाजपा के चुनाव में जा रहा है ई सब’।

किसी ने पूछा, कैसे जाने पांडे जी, जवाब चाय वाले भोलू ने दिया, ‘जानते नहीं हैं, छोटका मोदी से लेकर ऊ नीतीश और तेजस्वी सब एनही से न पूछकर आगे चलता है’।

इस जवाब के बाद न पांडे जी के पास कहने को कुछ बचा था न बाकी किसी के पास, सो सब मुस्करा कर रह गये। हम भी पैसा देकर आगे बढ़ गये।

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