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छऊ गुरु पद्मश्री मंगला चरण मोहंती का निधन, 90 साल की उम्र ली अंतिम सांस

कलानगरी सरायकेला से छऊ को सात समुंदर पार तक पहुंचा कर ख्याति दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले छऊ गुरु पद्मश्री मंगला चरण मोहंती (90) का शुक्रवार की शाम को निधन हो गया। उन्होंने जमशेदपुर के कदमा स्थित आवास में अंतिम सांस ली।

वर्ष 2009 में मिला था पद्मश्री
टाटा कंपनी की सेवा में रहते हुए छऊ गुरु मंगलाचरण मोहंती ने ना केवल देश-विदेश में छऊ का प्रदर्शन किया बल्कि इन्हीं उपलब्धियों की वजह से भारत सरकार ने इन्हें वर्ष 2009 में पद्मश्री से सम्मानित किया। इसके बाद भी वे लगातार छऊ से जुड़े रहे। हाल के वर्षों तक मोहंती बिष्टुपुर स्थित मिलानी हॉल में छऊ का प्रशिक्षण देते रहे।

नृत्य के कारण ही मिली थी नौकरी
राजकीय छऊ कला केंद्र के निदेशक तपन पट्टनायक ने शोक संवेदना प्रकट कर उनके निधन को कला जगत के लिए अपूरणीय क्षति बताते हुए कहा वे जमशेदपुर के विभिन्न जगहों में छऊ नृत्य का प्रदर्शन करते थे। एक कार्यक्रम में टाटा स्टील के अधिकारी भी छऊ नृत्य देखने पहुंचे थे। मोहंती के छऊ नृत्य से मोहित होकर अधिकारियों ने उन्हें टाटा स्टील में नोकरी का प्रस्ताव दिया जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया।

छऊ को मिल चुके है सात पद्मश्री
कोल्हान प्रमंडल के सरायकेला-खरसावां जिले की पहचान छऊ नृत्य के लिए है। छऊ नृत्य की शैली खास है। छऊ के कारण सरायकेला की ख्याति पूरी दुनिया में है और अबतक छह कलाकारों को देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्मश्री पुरस्कार मिल चुका है। यहां छऊ नृत्य सीखने दूसरे देशों से भी लोग आते हैं और यहां के कलाकारों को दूसरे देशों से प्रदर्शन का बुलावा आता ही रहता है। अब तक पद्मश्री पाने वालों में सुधेंद्र नारायण सिंहदेव(1991), केदार नाथ साहु(2005), श्यामा चरण पति (2006), मंगला चरण मोहंती(2009), मकरध्वज दारोघा (2011), गोपाल प्रसाद दुबे (2012) व शशधर आचार्य(2020) शामिल हैं।

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