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चुनावी समर में उतरने वाले छोटे दलों के 90 प्रतिशत प्रत्याशी नहीं बचा पाते हैं जमानत

हाल के वर्षों में चुनावी मैदान में उतरने की दलों में होड़ सी मची है। कोई भी राजनीतिक दल बनाकर चुनावी रण में उतर जा रहा है। भले ही उन दलों में कइयों को गिनती के भी वोट नहीं मिलते हों। 90 फीसदी से अधिक तो जमानत भी नहीं बचा पाते, पर उनकी चुनाव लड़ने की हसरतें हिलोरे मारती रहती हैं। एक समय था जब मुश्किल से 8 से 10 राष्ट्रीय और  5-6 राज्यस्तरीय पार्टियां बिहार विधानसभा के चुनावी रण में उतरती थीं। अब इनकी संख्या 150 के पार (पंजीकृत सहित) पहुंच गई है।

पिछले यानी 2015 के विधानसभा चुनाव में 137 पंजीकृत दलों के 1145 उम्मीदवार चुनावी मैदान में उतरे थे। इनमें से मात्र चार को ही जीत हासिल हुई। इसी तरह 2010 के चुनाव में 72 छोटे दलों ने 591 प्रत्याशी दिए थे। इनमें से एक भी नहीं जीत सके। बिहार में 1952 में हुए पहले विधानसभा चुनाव में 11 राष्ट्रीय पार्टियां और चार राज्यस्तरीय दलों ने अपने प्रत्याशी उतारे थे। वहीं एक पंजीकृत दल ऑल इंडिया गणतंत्र परिषद ने भाग्य आजमाया था। उसे एक सीट मिली थी। बिहार में अब तक हुए चुनाव की अगर बात करें तो 1969 के चुनाव से ठीकठाक की संख्या में पंजीकृत दलों के चुनावी मैदान में उतरने का सिलसिला शुरू हुआ। दस दलों ने चुनाव आयोग में विभिन्न नामों से पंजीकरण कराकर उम्मीदवार दिए थे। इन दलों के 434 उम्मीदवार मैदान में थे। 26 ने जीत भी हासिल की थी।     

 यहां गौर करने वाली बात यह है कि कई दल ऐसे थे जो कांग्रेस और अन्य बड़े दलों से टूट कर बने थे। इसे बाद 1972 के चुनाव में भी दस पंजीकृत दल उतरे। इस चुनाव में सात राष्ट्रीय और पांच राज्यस्तरीय दल के रूप में मान्यता प्राप्त पार्टियों ने किस्मत आजमायी थी। 1985 में पंजीकृत दलों की संख्या एकदम से घटी और तीन तक पहुंच गई, लेकिन इसके ठीक बाद 1990 में हुए चुनाव में पंजीकृत दलों की बाढ़ सी आ गई। आठ राष्ट्रीय और पांच राज्यस्तरीय दलों के अलावा 32 पंजीकृत पार्टियां चुनावी मैदान में कूदीं।

1995 में 38 पंजीकृत दल चुनाव में उतरे
 वर्ष 1995 के आमचुनाव में 38 पंजीकृत दल चुनाव में उतरे। यहां गौर करने वाली बात यह है कि इसी चुनाव से राज्यस्तरीय दलों की संख्या में भी इजाफा शुरू हुआ। इसके पहले के चुनावों में दो से पांच राजस्तरीय पार्टियां मैदान में थीं, जिनकी संख्या बढ़कर नौ हो गई। 2000 के चुनाव में इनकी संख्या और बढ़ी और 12 तक पहुंच गई।

वर्ष 2015 में सारे रिकॉर्ड हुए ध्वस्त
2015 के विधानसभा चुनावों में पंजीकृत दलों के चुनाव लड़ने की महत्वाकांक्षा ने अब तक के सारे रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए। इस चुनाव में 137 पंजीकृत दलों ने अपने उम्मीदवार दिए। इसी तरह 13 राज्यस्तरीय दलों ने भी अपनी किस्मत आजमायी। इनमें चार बिहार के तो 9 अन्य राज्यों के थे। इस बार भी भारी संख्या में पंजीकृत दलों के चुनावी दंगल में उतरने की उम्मीद है।

बदलती रहती है दलों की संख्या
चुनावों के प्रदर्शन के आधार पर मान्यता प्राप्त दलों की संख्या  बदलती रहती है।10 जनवरी  2020 की तारीख में चुनाव आयोग की वेबसाइट पर राष्ट्रीय दलों की संख्या 7, राज्य स्तरीय दलों की संख्या 35 और गैर मान्यता प्राप्त पंजीकृत राजनीतिक दलों की  संख्या 2543 थी।

राज्यस्तरीय दल  
जिस पार्टी का प्रभाव एक राज्य या उसके आसपास हो तो उसे राज्यस्तरीय या क्षेत्रीय दल कहते हैं। यदि कोई पार्टी राज्य विधानसभा की कुल सीटों में से कम-से-कम तीन फीसदी सीट या कम-से-कम 3 सीटें, जो भी ज्यादा हो प्राप्त करती हैं तो उसे राजस्तरीय दल की मान्यता मिलती है। 

राष्ट्रीय दल
किसी पंजीकृत दल को तीन विभिन्न राज्यों में लोकसभा की  कुल सीटों की कम से कम दो प्रतिशत सीटें हासिल की हों। कोई दल चार अलग-अलग राज्यों में लोकसभा या विधान ॉसभा चुनाव में कम से कम छह फीसदी मत पाये हो और लोकसभा में कम से कम चार सीटें हासिल की हों। किसी भी दल को कम से कम चार या उससे अधिक राज्यों में राज्यीय दल की मान्यता प्राप्त हो।

किस वर्ष पंजीकृत दलों ने उतारे प्रत्याशी
विस चुनाव- पंजीकृत दल-प्रत्याशी उतारे-सीटें जीतीं

1952              01              01            01                  
1957             00              00            00
1962            02              20             00    
1967            01              60            13                  
1969           10              434           26    
1972           10             169            10                  
1977           08               95            04                  
1980           07               93            12          
1985          03               59            10                
1990          32              705           11                
1995          38              896          20                  
2000          31             450           03                
2005 (फरवरी)      49      536        29              
2005(अक्टूबर)     40       167       01
2010                   72       591         00    
2015                   137     1145       04
 

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