चीन सीमा पर तनातनी के बाद अब भारत-नेपाल सीमा पर मजबूत होगी रक्षा और आपदा की निगरानी

चीन सीमा पर तनातनी के बाद अब भारत-नेपाल सीमा पर मजबूत होगी रक्षा और आपदा की निगरानी

भारत-नेपाल सीमा पर मौसम के पूर्वानुमान के लिए वेदर ऑब्जर्वेशनल नेटवर्क (मौसम पूर्वानुमान नेटवर्क) दुरुस्त करने की तैयारी है। हाल के दिनों में भारत-चीन सीमा पर तनातनी और भारत-नेपाल के रिश्तों में आई खटास के बाद रक्षा कारणों से इसे बेहद संवदेनशील और महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आपदा  प्रबंधन में भी इससे मदद मिलेगी।

फिलहाल नेटवर्क की सघनता नहीं होने से मौसम पूर्वानुमान में मुश्किलें आती हैं। ऐसे में बॉर्डर की निगरानी पर भी इसका असर पड़ता है। मौसम विज्ञान केंद्र की ओर से इसकी सूची बनाई जा रही है कि किन उपकरणों की बॉर्डर के इलाकों में बेहद जरूरत है। अगले हफ्ते दिल्ली में इस बाबत बैठक भी संभावित है। अन्य राज्यों के सीमावर्ती जिलों में भी नेटवर्क को दुरुस्त किया जाएगा।

लद्दाख की ओर चीनी सैनिकों को भारतीय सेना द्वारा मुंहतोड़ जबाव दिए जाने के बाद यह अंदेशा जताया जा रहा है कि भारत की नेपाल से लगी सीमा पर शांति व्यवस्था को असहज करने की कोशिश की जा सकती है।  ऐसे में अभी से ही सरहद पर जमीनी निगरानी के साथ-साथ हवाई सुरक्षा को भी बेहतर करने पर बल दिया जा रहा है। सैन्य कार्रवाई की स्थिति में मौसम के इनपुट की उपयोगिता बढ़ जाती है। ऐसे में बेहतर वेदर ऑब्जर्वेशन नेटवर्क होने पर रक्षा मामले में इससे काफी मदद मिलेगी। 

आपदा प्रबंधन में भी होगी सहूलियत
इन इलाकों में मौसम पूर्वानुमान नेटवर्क को सघन करने से आपदा प्रबंधन में भी मदद मिलेगी। बाढ़, वज्रपात और अधिक बारिश से हर साल बिहार में जान-माल की भारी क्षति होती है। पूर्वानुमान से जुड़े उपकरणों के लगने से समय पर उनका आकलन हो सकेगा। समय पर राज्य व केंद्र सरकार को महत्वपूर्ण इनपुट दिया जा सकेगा। 

हवाई सेवाओं के लिए भी होगा महत्वपूर्ण
इसे हवाई सेवाओं के विस्तार से जोड़कर भी देखा जा रहा है। दरभंगा एयरपोर्ट से शीघ्र उड़ान शुरू होनी है। ऐसे में रिजनल कनेक्टिविटी स्कीम के तहत अन्य एयरपोर्ट को भी विकसित करने की योजना बन सकती है। उड़ान व लैंडिंग से पहले हवा की दिशा व अन्य कई इनपुट एटीसी के जरिये पायलट तक पहुचंते हैं।

भारत-नेपाल सीमा पर वेदर ऑब्जर्वेशनल नेटवर्क को सघन करने की तैयारी है। बिहार के कई जिलों की सीमाएं इससे मिलती हैं। आरंभिक काम शुरू हो चुका है।   – विवेक सिन्हा, निदेशक, मौसम विज्ञान केंद्र, पटना