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घरानों की राजनीति : नेपाल की सीमा से लगे पश्चिम चंपारण के सिकटा विधानसभा क्षेत्र का बिहार की राजनीति में खास महत्व

नेपाल की सीमा से लगे पश्चिम चंपारण के इस विधान सभा क्षेत्र का राज्य की राजनीति में एक खास महत्व रहा है। पहाड़-जंगल के समीप का यह इलाका आज भी कई बुनियादी सुविधाओं की बाट जोह रहा। नाम सिकटा, जहां की जनता की अधिकांश हसरतें समीकरणों के झोल में दशकों से ओझल होती आयीं हैं। यह वीआईपी सीट घरानों की राजनीति की विरासत तो बनी रही, पर विरासत में लोगों के हिस्से वैसा कुछ न आया जिससे पर वे आज इठला सके। छह बार के विजेता को दूसरी बार हराकर पटना पहुंचे जदयू विधायक के सिर चढ़े मंत्री के ताज को ही जनता अपनी बड़ी उपलब्धि मानती आयी है।  
 सिकटा, मैनाटांड़ के साथ नरकटियागंज प्रखंड की तीन पंचायतों को मिलाकर सिकटा विस क्षेत्र गठित है। यह 1951 से ही अस्तित्व में है। फजलुर रहमान यहां से पहली बार विधायक चुने गये थे। कांग्रेस व निर्दलीय का चार-चार बार इस सीट पर कब्जा रहा है। यहां से सबसे अधिक बार जीतने का रिकॉर्ड दिलीप वर्मा के पास है। उन्होंने बीजेपी, सपा, सीवीपी व निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में छह बार चुनाव में जीत हासिल की है। वर्तमान में अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री खुर्शीद उर्फ फिरोज अहमद यहां से विधायक हैं। उन्होंने दिलीप वर्मा को हराकर सीट पर कब्जा जमाया है। हर बार की तरह इस बार भी चुनावी जंग दिलचस्प होने की उम्मीद है। सीटिंग के तहत यह सीट एनडीए से जदयू को मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। वहीं भाजपा के दिलीप वर्मा भी चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं। ऐसे में मुख्य लड़ाकों के रथ और सारथी दोनों को लेकर बस यहां कयासों का दौर चल रहा है।
 
धान के कटोरे में गन्ने का सहारा
सिकटा की पहचान कभी धान के कटोरे के रूप में थी। सिर्फ सिकटा प्रखंड में चार-चार राइस मिलें चला करती थीं। सिकटा से सटे नेपाल के भिस्वा में भी दो राइस मिलें थीं। मिलें बंद होते ही किसानों ने धान से मुंह मोड़ गन्ना लगाना शुरू कर दिया। अब इस क्षेत्र में ज्यादातर किसान गन्ने की खेती कर रहे। पहाड़ी नदियों की अधिकता के कारण क्षेत्र में फसलों के लिए पानी आसानी से उपलब्ध हो जाता है। मगर, कई बाढ़ अन्नदाताओं की किस्मत को बाढ़ धो-पोंछ देती है।
 
नौ चुनाव में मुस्लिम तो आठ में सवर्णों ने मारी बाजी
सिकटा विधानसभा क्षेत्र में मुस्लिम, दलित व पिछड़ों की बहुलता है। नौ चुनाव में मुस्लिम प्रत्याशियों ने तो आठ में सवर्ण प्रत्याशियों ने विजय पायी है। चुनाव की अंतिम घड़ी में खास समीकरणों के गढ़े जाने से हर बार राजनीतिक पंडितों का पूर्वानुमान बस किताबी बना रह जाता है। विश्लेषकों के मुताबिक विस क्षेत्र में सबसे अधिक 36 फीसदी मुस्लिम आबादी है। दूसरे नंबर पर दलित 25, तीसरे पर यादव 14, चौथे पर कुर्मी की संख्या 12 फीसदी है। यहां आठ फीसदी कोईरी समुदाय के भी वोटर बताये जाते हैं।  

कुल मतदाता : 264931
महिला मतदाता : 123222
पुरुष मतदाता : 141709
थर्ड जेंडर : 10
कुल बूथ  : 393
प्रखंड : 03
पंचायत : 35

कब कौन किस पार्टी से जीते

साल                        जीते                  पार्टी
2015        खुर्शीद उर्फ फिरोज अहमद         जदयू
2010                  दिलीप वर्मा               निर्दलीय
2005(अक्टूबर) खुर्शीद उर्फ फिरोज अहमद          कांग्रेस
2005(फरवरी)       दिलीप वर्मा              सपा
2000                 दिलीप वर्मा               बीजेपी
1995                  दिलीप वर्मा             सीवीपी
1991(उपचुनाव)     दिलीप वर्मा             निर्दलीय
1990                  दिलीप वर्मा             निर्दलीय
1985                  फैयाजुल आजम       निर्दलीय
1980                  धर्मेश प्रसाद वर्मा       जेएनपी
1977                  फैयाजुल आजम        कांग्रेस
1972                  फैयाजुल आजम         एनसीओ
1969                  रैफुल आजम           कांग्रेस
1967                  यूएस शुक्ला             सीपीएम
1962                  रैफुल आजम           एसडब्ल्यूए
1957                  फजलुर रहमान         कांग्रेस
1952                  फजलुर रहमान         कांग्रेस

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