क्या झारखंड में बिजली का बिल बढ़ेगा या कम होगा ये लिया गया है फैसला

क्या झारखंड में बिजली का बिल बढ़ेगा या कम होगा ये लिया गया है फैसला

झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग की राज्य सलाहकार समिति की वर्चुअल बैठक में मंगलवार को बिजली की दर में बढ़ोतरी नहीं करने की जोरदार मांग उठी। हालांकि आयोग ने यह स्पष्ट किया है कि बिजली की दर उसकी लागत है न कि राज्य सरकार या कंपनी की ओर से लिया जाने वाला कर, जिसे न लेने का निर्णय किया जा सके। संकेत है कि बिजली की दर बढ़ेगी, लेकिन उम्मीद की जा रही है कि दर में बढ़ोतरी बीते वर्षों की तुलना में कम हो सकती है। बैठक के दौरान सूबे में बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता पर काफी सवाल भी खड़े किए गए। 

बिजली की दर में बढ़ोतरी पर फैसला लेने के पहले राज्य विद्युत नियामक आयोग ने सलाहकार समिति के सदस्यों के साथ औपचारिक बैठक पूरी कर ली है। अब आयोग सभी पहलुओं का अध्ययन करने के बाद बिजली की नई दरें तय करेगा। इस माह के अंत तक दर निर्धारित किए जाने की उम्मीद है। बैठक के दौरान झारखंड बिजली वितरण निगम पर लोगों ने काफी नाराजगी जाहिर की। दूसरी ओर बिजली वितरण निगम की ओर से दर में बढ़ोतरी के पक्ष में तथ्य पेश किए गए और पड़ोसी राज्यों में बिजली की दर और वितरण की स्थिति से तुलनात्मक आंकड़ा भी रखा गया। 

बैठक के प्रारंभ में झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग के सदस्य (तकनीक) आरएन सिंह ने कहा कि दर निर्धारण की प्रक्रिया की यह अंतिम कड़ी है। कोरोना काल के कारण इस पर सवाल उठाया जा रहा था। उन्होंने स्पष्ट किया कि आयोग को नियमानुसार निर्धारित समय सीमा में यह प्रक्रिया पूरी करनी ही होती है। टैरिफ पीटिशन दायर होने के 120 दिनों के भीतर निर्धारण किया जाना है। उन्होंने कई मुद्दों पर जेबीवीएनएल से सवाल-जवाब किया। और उनके एक-एक प्रस्ताव पर विस्तार से चर्चा की। 

बैठके के दौरान कई सदस्यों ने कहा कि जेबीवीएनएल केवल दर बढ़ाने के लिए तथ्य प्रस्तुत करता है। दर नियंत्रित करने के लिए इनके पास कोई योजना नहीं दिखती। समय पर उपभोक्ताओं को बिल नहीं मिलता। जेबीवीएनएल के अकाउंट को अधूरा कहा गया। ऑडिट को भी अव्यावहारिक बताया गया। कहा गया कि जब इनका एकाउंट ठीक नहीं है तो बिजली की औसत दर का निर्धारण कैसे कर किया जाता है। औद्योगिक संगठनों से जुड़े बीके तुलस्यान, अजय, अंजय पचेरीवाल आदि ने  अपना पक्ष रखा। आईआईएम रांची के प्रोफेसरों ने जेबीवीएनएल को अपना डाटा दुरुस्त रखने की सलाह दी। कहा कि इसी आधार पर सही आंकलन हो सकेगा। इससे बिजली की वास्तविक दर निर्धारित करने में मदद मिलेगी। 
 
एक राज्य, एक बिजली दर का तर्क : बैठक के दौरान राज्य बिजली वितरण निगम ने एक राज्य, एक बिजली दर की सिफारिश करते हुए कहा कि एक समान दर होने से सहूलियत और उपभोक्ताओं की नाराजगी दूर होगी। एक राज्य में अलग दर होने से उपभोक्ताओं को समस्या होती है।