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किसान बिल की बातों को किसानों तक पहुंचाने के लिए BJP ने चलाया अभियान

पायल मेहता

नई दिल्ली. सत्तारूढ़ बीजेपी (BJP) ने किसान बिल (Farm Bill) का विरोध कर रहे किसानों के बीच विभिन्न माध्यमों से जाने का रास्ता अपनाया है. किसानों (Farmers) को शांत करने के लिए ऐसा किया गया है. केन्द्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ने पंजाब (Punjab), हरियाणा और आस-पास के इलाकों के केन्द्रीय मंत्रियों और सांसदों से बात की है और एनडीए (NDA) शासित राज्यों के कृषि मंत्रियों के साथ वर्चुअल बैठकें करते हुए बिलों पर सरकार का पक्ष लेने के लिए कहा है. आरएसएस (RSS) से सम्बन्ध रखने वाले भारतीय किसान संघ (BKS), किसान मोर्चा और स्वदेशी जागरण मंच के पदाधिकारियों तक भी तोमर पहुंचे हैं. इन संगठनों (organisations) ने भी बिलों पर आपत्ति जताई है.

तोमर ने बिल की विशेषताओं को लेकर राज्य और राष्ट्रीय प्रवक्ताओं (national spokesperson) को जानकारी दी है. उसकी एक प्रति प्रति भाजपा सांसद (BJP MP) कार्यालय द्वारा सभी कार्यकर्ताओं को भेजी गई है. जहां बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा (JP Nadda) ने विपक्ष के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाया है. वहीं नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार (Central Government) किसानों को आश्वस्त करने का प्रयास कर रही है कि एमएसपी (MSP) जारी रहेगा. सभी सांसदों को निर्देशित किया गया है कि वे अपने क्षेत्रों में प्रेस मीटिंग करें ताकि विपक्ष (opposition) के हमलों को विफल किया जा सके.

जनता से संवाद करने वाले बीजेपी के मंत्री, सांसदों और नेताओं को दिया गया ये कामसरकार का कहना है कि किसान उत्पादन और वाणिज्य अधिनियम 2020 बिल किसानों को अपनी फसलें बिना कृषि उपज मंडी समिति की सहमति के किसी भी व्यापारी को बेचने की अनुमति देता है. यह कानून सरकार के एक राष्ट्र एक बाजार की दृष्टि का हिस्सा है.

मूल्य आश्वासन और फार्म सेवा अधिनियम, 2020 बिल किसान (सशक्तीकरण और संरक्षण) समझौते पर कृषि समझौतों को एक राष्ट्रीय ढांचा प्रदान करता है. यह किसानों को कृषि सेवाओं और थोक विक्रेताओं एवम् निर्यातकों के साथ कृषि सेवाओं और बिक्री को लेकर जोड़ने के लिए किसानों की रक्षा करता है. भविष्य की खेती एक उचित और पारदर्शी तरीके से पारिश्रमिक मूल्य ढांचे में उत्पादन करेगी.

आवश्यक वस्तु अधिनियम बिल 2020 केंद्र सरकार को आपात स्थिति या असाधारण परिस्थितियों में केवल कुछ पदार्थों की आपूर्ति की अनुमति देता है. पहले आपात स्थिति में साहूकार किसानों से फसल खरीदकर कालाबाजारी में लिप्त होते थे.

बीजेपी का यह भी कहना है कि आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 नियंत्रित करने के युग से सम्बंधित है. कांग्रेस ने एक मजबूत कानून द्वारा अधिनियम बदलने का वादा किया था जिसे आपात स्थिति में लागू किया जा सकता है. उन्होंने कृषि उपज मंडी समितियों को निरस्त करने का वादा भी किया था. अब वही नरेंद्र मोदी सरकार ने किया है. कृषि उत्पादन व्यापर और वाणिज्य अधिनियम प्राथमिक कृषि वस्तुओं को बिना रोक के अपने राज्य के अलावा अन्य राज्यों में बेचने की अनुमति देता है.

बीजेपी के नेता यह भी बताते हैं कि कांग्रेस ने निर्यात और अंतरराज्य व्यापर समेत कृषि उत्पादों का व्यापर करने का वादा भी किया था. यह सभी प्रतिबन्धों से मुक्त है लेकिन अब बिल का विरोध हो रहा है. लोगों का राजनीतिक शोषण करने के लिए गलत सूचनाएं दी जा रही है.

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बीजेपी का यह भी कहना है कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने फरवरी 2012 में राज्यों को कृषि उत्पादन विपणन समिति (APMC) अधिनियम में संशोधन करने के लिए कहा था. मनमोहन सिंह ने यह भी कहा था कि इस तरह के संशोधन से देश में कृषि उत्पादों की मुफ्त आवाजाही होगी.

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