किशनगंज में कल प्रधानमंत्री मोदी एक्वेटिक रेफरल लैबोरेटरी का करेंगे शिलान्यास 

narendra modi

बिहार के किशनगंज जिले में डॉ. कलाम कृषि कॉलेज परिसर में बने मत्स्य कॉलेज में अब छात्रों के लिए आधुनिक एक्वेटिक रेफरल लैबोरेटरी का निर्माण होगा। जिसके जरिए छात्र-छात्राएं प्रायोगिक ज्ञान अर्जित कर मछली पर विभिन्न तरह के रिसर्च कर सकेंगे।

मत्स्य कॉलेज परिसर में बनने वाली एक्वेटिक रेफरल लैबोरेटरी के निर्माण कार्य का शिलान्यास 10 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी वीडियो कांफ्रेंसिंग से करेंगे। प्रधानमंत्री स्पंदन योजना के तहत बनने वाली इस लैबोरेटरी पर करीब 10 करोड़ रुपए खर्च होंगे। प्रधानमंत्री के शिलान्यास कार्यक्रम को लेकर मत्स्य कॉलेज में जोर शोर से तैयारी की जा रही है। किशनगंज के अलावा पटना के पशु विज्ञान विश्वविद्यालय में भी इसी तरह की लैबोरेटरी का निर्माण होगा। कॉलेज के प्रचार्य वीपी सैनी ने एक्वेटिक रेफरल लैबोरेटरी में मछली के अलावे जितने भी जलीय जीव हैं उनमें होने वाली बीमारी व उसके निदान को लेकर जांच की जाएगी। इसके अलावा लैब में जल व मिट्टी की भी जांच होगी। 

चार तरह के बनेंगे लैब
कॉलेज के वैज्ञानिक डा. अभिषेक ठाकुर ने बताया कि चार तरह के लैब का निर्माण होगा। जिसमें डिजीज डायग्नोस्टिक लैब, मॉल्युकुलर बायोलॉजी लैबोरेटरी, माइक्रोबॉयोलॉजी लैबोरेट्री व वाटर एंड स्वॉयल लैबोरेटरी का निर्माण होगा। सभी लैबोरेटरी में छात्र-छात्राएं अलग-अलग तरह की जानकारियां दी जाएगी। डिजीज डायग्नोस्टिक के जरिए मछलियों में विभिन्न तरह की डिजीज व उसके बचाव के बारे में जानकारी दी जाती है। जब मत्स्यपालक मछली पालन करते हैं तो मछलियां रोग ग्रस्त हो जाती है। कई बार देखा जाता है कि अज्ञात बीमारी से मछली की मौत हो जाती है। डिजीज लैबोरटरी में इन्हीं सब बीमारी को डिटेक्ट करने व डायग्नोस्ट करने के ज्ञान दिए जाएंगे। माइक्रो बायोलॉजी में मछली के आर्गेन से संबंधित प्रायोगिक कार्य कराए जाएंगे। वाटर एंड स्वायल में मछली पालन के लिए तालाबों में पानी व मिट्टी की जांच से संबंधित प्रायोगिक कार्य सिखाए जाएंगे।