कमला बलान में आई उछाल से घनश्यामपुर के 10 गांव फिर हुए जलमग्न, 21 नावों का किया जा रहा परिचालन

कमला बलान में आई उछाल से घनश्यामपुर के 10 गांव फिर हुए जलमग्न, 21 नावों का किया जा रहा परिचालन

सितंबर में कमला बलान नदी में अचानक आयी उछाल से प्रखंड के डूब क्षेत्र में बसे 10 गांवों में बाढ़ का पानी फिर से प्रवेश कर गया है। इन गांवों में बने दर्जनों घरों में बाढ़ का पानी घुसने से लोग एक बार फिर सुरक्षित ठिकाने की ओर पलायन कर रहे हैं। गांव में अफरातफरी मची है। जितिया पर्व के नहाय-खाय के दिन बाढ़ प्रभावित गांवों के लोगों को अपने परिवार तथा मवेशियों की जान बचाने के लाले पड़े हैं।
नदी के दोनों तटबंधों के बीच बसे बैजनाथपुर, बाऊर, नवटोलिया, गिदराही, भरसाहा, कनकी मुसहरी, लगमा मुसहरी आदि गांव टापू में तब्दील हो गये हैं। इन गांवों की सभी सड़कें डूबी हुई हैं। मध्य विद्यालय रसियारी, मध्य विद्यालय बाऊर कन्या सहित आधा दर्जन स्कूलों में बाढ़ का पानी घुस गया है। नदी का जलस्तर झंझारपुर में खतरे के निशान से लगभग 1.90 मीटर ऊपर बताया जाता है। इससे तटबंध के दबाव तथा कमजोर बिंदुओं पर पानी का दबाव बढ़ गया है। बाऊर-घनश्यामपुर प्रधानमंत्री ग्राम्य सड़क पर लगभग पांच फीट पानी बह रहा है।
अमूमन अगस्त में बाढ़ समाप्त होते ही इस क्षेत्र के किसान दूर-दराज के गांवों से मुहमांगी कीमत पर धान के बिचड़े लाकर मघा नक्षत्र में रोपनी कर लेते हैं। लेकिन इस वर्ष सितंबर में बाढ़ आने से इन किसानों के परिश्रम तथा पूंजी पर पानी फिर गया है। खेत-खलिहान, घर-आंगन में पानी घुसने, चापाकल, शौचालय आदि डूबने से बाढ़ पीडि़तों के सामने पशु चारा, ईंधन, खाद्यान्न, पेयजल तथा शौचालय आदि जाने की समस्या उत्पन्न हो गयी है। रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने के लिए लोग नाव से आवाजाही कर रहे हैं।
इस बीच सीओ दीनानाथ कुमार तथा थानाध्यक्ष आशुतोष कुमार झा ने बाढ़ का जायजा लिया। सीओ ने बताया कि बाढ़ से छह-सात हजार की आबादी प्रभावित हुई है। 21 सरकारी तथा निजी नावों का परिचालन किया जा रहा है। हालांकि जल संसाधन विभाग के जेई अश्विनी कुमार ठाकुर ने तटबंध को पूरी तरह सुरक्षित बताया है।