उद्धव ठाकरे मामले में अखाड़ा परिषद ने चंपत राय के बयान को बताया अहंकारी, दी ये नसीहत

प्रयागराज. महाराष्ट्र (Maharashtra) के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) को लेकर बयानबाजी का दौर जारी है. पहले अयोध्या के हनुमान गढ़ी के महंत राजू दास (Mahant Raju Das) द्वारा उन्हें अयोध्या (Ayodhya) में नहीं आने देने की बात कही गई. इसके बाद राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय (Champat Rai) का बयान आ गया, जिसमें उन्होंने उद्धव के समर्थन में चुनौती दे डाली. मामले में अब अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद (AkhilBhartiya Akhada Parishad) ने दखल दिया है और बयानबाजी से बचने की सलाह दी है.

अहंकारी व्यक्ति बहुत दिन तक नहीं चल पाता: महंत नरेंद्र गिरि

अखाड़ा परिषद अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी ने राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय के बयान को अहंकारी बताया है. महंत नरेंद्र गिरी ने कहा कि इस बयान से प्रतीत होता है कि चंपत राय को अहंकार हो गया है. इस तरह का बयान चंपत राय को नहीं देना चाहिए.

उन्होंने कहा कि चंपत राय विश्व हिंदू परिषद के पुराने नेता हैं और उनका एक कद भी है. अगर किसी संत ने कोई बयान दिया था तो उसके विरोधाभास में उन्हें ऐसा बयान नहीं देना चाहिए था. महंत नरेंद्र गिरि ने कहा अहंकार भगवान का भोग होता है. अहंकारी व्यक्ति बहुत दिन तक नहीं चल पाता.ये भी पढ़ें: अयोध्या के संतों ने दी चेतावनी- भूल से भी शहर में प्रवेश ना करें उद्धव ठाकरे

महंत नरेंद्र गिरी ने कहा कि चंपत राय ने हमेशा संत महात्माओं का सम्मान किया है. आगे भी संत महात्माओं का सम्मान करते रहें तो अच्छा बाकी आपकी इच्छा. साथ ही उन्होंने कहा कि संत महात्माओं से भी अपील करेंगे कि वह ऐसे बयान न दें.

राजू दास के बयान को बताया गलत, पालघर की घटना का जिक्र

महंत नरेंद्र गिरी ने कहा कि हनुमानगढ़ी के महंत राजू दास ने आवेश में आकर गलत बयान दिया था. महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे से साधु संत पालघर की घटना से ही नाराज हैं. पालघर में जूना अखाड़ा के दो साधुओं और ड्राइवर की नृशंस हत्या हुई थी. संतों का आरोप है कि इस हत्याकांड पर महाराष्ट्र सरकार ने ठोस कार्रवाई नहीं की. इसी आवेश में आकर हनुमानगढ़ी के महंत राजू दास ने बयान दिया है.

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महंत नरेंद्र गिरि ने कहा कि किसी भी व्यक्ति का मंदिर में दर्शन करने जाने का पूरा अधिकार है. किसी व्यक्ति को किसी सनातन धर्मी को मंदिर जाने से रोकने का अधिकार नहीं है.