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अच्छी खबर! सहरसा के आरण में अब मोरों का होगा संरक्षण, प्रस्ताव को वन विभाग ने दी स्वीकृति

बिहार के सहरसा जिले के आरण गांव में मोर के संरक्षण और पुनर्वास पर वन विभाग नौ लाख 76 हजार राशि खर्च करेगा। आरण गांव में मोर के संरक्षण और पुनर्वास के लिए वन प्रमंडल सहरसा के द्वारा भेजे गए प्रस्ताव को मुख्य वन संरक्षक सह मुख्य वन प्रतिपालक पटना ने स्वीकृति दे दी है।

इसके साथ ही अब ग्रामीणों के संरक्षण में पल रही विलुप्त हो जा रही पक्षी की देखरेख की दिशा में वन विभाग कई काम करेगा। वन प्रमंडल पदाधिकारी शशिभूषण झा ने बताया कि भेजे गए प्रस्ताव को मुख्य वन संरक्षक सह मुख्य वन्य प्रतिपालक से स्वीकृति मिलते आरण गांव में मोर के संरक्षण और पुनर्वास को लेकर कई काम किए जाएंगे। अगले माह अक्टूबर के पहले सप्ताह से आरण में वन्य प्राणी सप्ताह मनाया जाएगा। 

इस दौरान लोगों को वन्य जीवों और पक्षियों के संरक्षण व पुनर्वास के लिए जागरुक किया जाएगा। ग्रामीणों से मेलजोल बढ़ाते हुए मोर की देखरेख के प्रति जन जागरूकता लाने के उद्देश्य से उनके बीच 1500 फलदार पौधे का वितरण किया जाएगा। मोर के पसंदीदा देसी सेमर के 200 पौधे लगाए जाएंगे। सेमर बड़ा पेड़ होता है और इस पर रहना और बैठना मोर को काफी पसंद आता है। 

इसके अलावा मोर के संरक्षण और पुनर्वास के सवाल को ले गांवों में बैठक का आयोजन किया जाएगा। जागरूकता कार्यक्रम के तहत बोर्ड, बैनर सहित अन्य माध्यमों से प्रचार प्रसार कराए जाएंगे। मोर को प्राथमिक उपचार देने के लिए फर्स्ट एड किट खरीदे जाएंगे। मोर की गतिविधियों को कैद करने के लिए कैमरे खरीदने की योजना भी बनाई जा रही है। 

मोर पर आधारित डाक्यूमेंट्री फिल्म दिखाई जाएगी
आरण गांव में मोर पर आधारित डाक्यूमेंट्री फिल्म दिखाकर ग्रामीणों को उसके रहन सहन के तरीके की जानकारी दी जाएगी। उसका सुरक्षित देखभाल किस तरीके से किया जाय उसे भी डाक्यूमेंट्री के जरिए दिखाया जाएगा। डीएफओ ने कहा कि आरण गांव सहित राज्य में अन्य जगहों पर पल रहे मोर पर आधारित डाक्यूमेंट्री फिल्म होगा। जो मोर के संरक्षण के प्रति जन जागरूकता लाने में काफी मददगार साबित होगा।

नवंबर माह में मोर का आंकलन और सर्वेक्षण करने आएगी टीम
इस साल के नवंबर महीने में मोर का आंकलन और सर्वेक्षण करने विशेषज्ञों की टीम आरण गांव आएगी। डीएफओ ने कहा कि भागलपुर से तीन सदस्यीय विशेषज्ञों की टीम आरण आएगी। ठंड के मौसम में मोर का आंकलन अच्छे तरीके हो उस सोच के साथ नवंबर माह में टीम को बुलाया गया है।

मोर ट्रैकिंग के लिए ट्रैकर किए गए प्रतिनियुक्त
आरण में मोर ट्रैकिंग के लिए वन विभाग ने एक ट्रैकर प्रतिनियुक्त किया है। कितनी संख्या में मोर है और कहां विचरता व आशियाना बना रखा उसकी जानकारी हासिल करने के लिए उसकी प्रतिनियुक्ति की गई है। डीएफओ ने कहा कि ग्रामीण रवि यादव को छह माह के लिए ट्रैकर के रूप में प्रतिनियुक्त किया गया है। ग्रामीणों को उपलब्ध कराए जाने वाले फलदार पौधे की सूची में किस-किसका नाम हो उसमें भी उसकी मदद ली जा रही है। उन्होंने कहा कि अब तक के सर्वेक्षण में 50 से अधिक की संख्या में आरण गांव में मोर के होने की बात सामने आई है। 

दिसंबर 2016 में मुख्यमंत्री भी आए थे मोर देखने
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 18 दिसंबर 2016 को निश्चय यात्रा के दौरान मोर देखने आरण गांव पहुंचे थे। बताया जाता है कि वर्ष 1984-85 में स्थानीय अभिनंदन यादव पंजाब से एक जोड़ा मोर लाया था। धीरे-धीरे मोर की संख्या में वृद्धि हुई और यह मोर का गांव बन गया। बारिश के दौरान हरे भरे खेत में मोर का नृत्य गांव की खूबसूरती बढ़ा देता है।

फोटो : आरण गांव के हरे भरे खेत में नृत्य करते मोर।
फोटो : आरण गांव के हरे भरे खेत में विचरता मोर।
फोटो : आरण गांव के पक्का मकान पर बैठा मोर।

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