अच्छी खबर: बिहार में सभी किसानों को खेती के लिए अलग से मिलेगी बिजली

electricity in villages more expensive than city in eight years

खेती के लिए अलग से बिजली देने की योजना इस महीने पूरी हो सकती है। किसानों के लिए डेडिकेटेड फीडर अलग करने का काम अब अंतिम चरण में है। हालांकि राज्य में बाढ़ के कारण कुछ इलाकों में इस योजना को पूरा करने में थोड़ी परेशानी हो सकती है, पर बिजली कंपनी की कोशिश है कि इसे हर हाल में इसी महीने पूरा कर लिया जाए। योजना पूरी होने पर अगले माह से राज्य के सभी किसानों को खेती के लिए अलग से बिजली मिलने लगेगी। 

गौरतलब है कि बिहार देश के चंद राज्यों में शामिल है जहां किसानों को मात्र 65 पैसे प्रति यूनिट की दर से बिजली मुहैया कराई जा रही है। बिहार के किसानों को अलग से बिजली देने की योजना दीनदयाल उपाध्याय ज्योति ग्राम योजना के तहत मार्च, 2016 में स्वीकृत हुई थी। 5856 करोड़ की इस योजना के काम का अवार्ड दिसम्बर 2016 से फरवरी 2017 के बीच हुआ। योजना में कुल 60 फीसदी केंद्र सरकार तो 40 फीसदी राज्य सरकार खर्च कर रही है।  योजना के तहत 33-11 केवी के 293 सब-स्टेशन बनाने का लक्ष्य तय किया गया। अब तक इसमें से 235 सब-स्टेशन बन चुके हैं जो लक्ष्य का 80 फीसदी है। कंपनी अधिकारियों ने कहा कि बाकी 58 सब-स्टेशनों का काम अंतिम चरण में है। 

वहीं, किसानों को घरेलू कामों के अलावा खेती के लिए अलग से बिजली देने के लिए 1388 फीडर अलग करने का निर्णय लिया गया। अब तक 1192 फीडर को अलग किया जा चुका है जो लक्ष्य का 86 फीसदी है। बाकी बचे 196 फीडर को अलग करने की प्रक्रिया चल रही है। खेती तक तार, पोल के अलावा किसानों की जरूरत के अनुसार से 25 व 63 केवी के ट्रांसफॉर्मर भी लगाए जा रहे हैं। 79 हजार 857 ट्रांसफॉर्मर में से 55 हजार 52 ट्रांसफॉर्मर लग चुके हैं जो लक्ष्य का 69 फीसदी है। 

कंपनी ने छह लाख 95 हजार किसानों को बिजली कनेक्शन देने का लक्ष्य तय किया। हालांकि इनमें से दो लाख 62 हजार लोगों ने ही आवेदन दिए। इसमें से अब तक एक लाख 42 हजार 453 लोगों का कनेक्शन दिया जा चुका है। लक्ष्य की तुलना में यह 54 फीसदी है। वहीं सोलर ऊर्जा से चलने वाले दो व तीन हॉर्सपावर के 3300 सोलर पम्प लगाने का लक्ष्य तय किया गया। इसमें से मात्र 931 लोगों ने ही आवेदन दिए। जो आवेदन आए, उसमें से सबों को सोलर पम्प दे दिये गए। 

पम्प होने पर ही आवेदन 
बिजली कंपनी मोटर पम्प होने पर ही लोगों को बिजली कनेक्शन दे रही है। सरकारी अनुदान या अपने स्तर से अगर किसी किसान ने बोरिंग करा रखा है तो वे बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन करते हैं। कंपनी भूमि स्वामित्व प्रमाण पत्र के आधार पर कनेक्शन दे देती है।