अच्छी खबर: प्लाज्मा थेरेपी से 65 % कोरोना संक्रमित मरीज हुए स्वस्थ्य

plasma therapy

बिहार में प्लाज्मा थेरेपी से इलाज किये गए 65 फीसदी कोरोना संक्रमित मरीज स्वस्थ्य हो गए। पटना एम्स में अबतक 260 लोगों ने प्लाज्मा दान किया। इनसे प्राप्त प्लाज्मा के माध्यम से 170 संक्रमित मरीजों का इलाज किया गया। इनमें से 110 संक्रमित स्वस्थ हो गए। जो कुल मरीज का करीब 65 फीसदी है। एम्स के प्रवक्ता डॉ. संजीव कुमार के अनुसार  मॉडरेट संक्रमितों में प्लाज्मा थेरेपी का सौ फीसदी बेहतर प्रभाव रहा, जबकि मॉडरेट सीवियर और सीवियर मरीजों में इसका प्रभाव कम पाया गया और प्लाज्मा थेरेपी के बावजूद मरीज का जीवन बचा पाना मुश्किल हो गया। उन्होंने बताया कि एम्स में अभी 30 गंभीर कोरोना संक्रमित मरीजों को प्लाज्मा थेरेपी की जरूरत है। 

प्लाज्मा रक्त का पीला तरल हिस्सा  है
प्लाज्मा थेरेपी का पूरा नाम कॉन्वलसेन्ट प्लाज्मा थेरेपी है। प्लाज्मा हमारे खून का पीला तरल हिस्सा होता है, जिसके जरिये सेल्स और प्रोटीन शरीर की विभिन्न कोशिकाओं तक पहुंचते हैं। हमारे शरीर में जो खून होता है उसका 55 फीसदी हिस्सा प्लाज्मा ही होता है। सिर्फ कोरोना में ही नहीं बल्कि इसके पूर्व इबोला वायरस से मुकाबले में भी प्लाज्मा थेरेपी इस्तेमाल में लाई गई है। 

यह एंटी बॉडी को मजबूत बनाता है 
संक्रमित मरीज जो स्वस्थ हो चुके हैं वे प्लाज्मा दान करते हैं। इस प्लाज्मा को दूसरे मरीजों में ट्रांसफ्यूजन के माध्यम से इंजेक्ट कर इलाज किया जाता है। डॉक्टरों के अनुसार हाइपरिम्यून ग्लोब्युलिन रोगियों में एंटी बॉडी को बेहतर बनाता है। मरीज के शरीर में प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत करता है और वह कोरोना वायरस से लड़ता है। इससे मरीज कोरोना वायरस को हराकर स्वस्थ हो जाता है और उसका जीवन बच जाता है। इस प्रकार, स्वस्थ हो चुके संक्रमितों के प्लाज्मा का संक्रमित मरीज के स्वस्थ होने में महत्वपूर्ण भूमिका होती है। 

प्लाज्मा दान करने वालों में नहीं होती कोई परेशानी
डॉ. संजीव कुमार ने बताया कि प्लाज्मा दानकर्ताओं से रक्त में स्थित सिर्फ प्लाज्मा ही लिया जाता है, शेष रक्त वापस कर दिया जाता है। रक्त से डब्ल्यूबीसी या आरबीसी नहीं निकाला जाता है। इसलिए प्लाज्मा दानकर्ताओं को प्लाज्मा दान के बाद किसी प्रकार की शारीरिक परेशानी नहीं होती है। 

प्लाज्मा दान करने पर पांच हजार मिलते हैं
राज्य सरकार की प्रोत्साहन योजना का सकारात्मक असर हुआ है। राज्य सरकार द्वारा प्लाज्मा डोनर को पांच हजार रुपये प्रोत्साहन राशि के रूप में उनके खाते में दी जा रही है। डॉ. संजीव के अनुसार प्रोत्साहन योजना के कारण कोरोना संक्रमित मरीज जो स्वस्थ हो चुके हैं, अब स्वेच्छापूर्वक प्लाज्मा डोनेट करने सामने आ रहे हैं। पहले से स्वस्थ होने वाले संक्रमितों की संख्या बढ़ी है, उससे भी प्लाज्मा डोनर बढ़े हैं। 

छह अस्पतालों को मिली है प्लाज्मा बैंक बनाने की अनुमति
राज्य में छह अस्पतालों को प्लाज्मा बैंक बनाने की अनुमति स्वास्थ्य विभाग ने दी है। इनमें पटना एम्स, इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान पटना, जयप्रभा ब्लड बैंक, पारस अस्पताल, महावीर कैंसर अस्पताल और जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज अस्पताल, भागलपुर शामिल हैं। जानकारी के अनुसार प्लाज्मा थेरेपी को लेकर आईजीआईएमएस, पटना में अबतक 16 लोगों ने प्लाज्मा दान किया है। यहां से पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल और नालंदा मेडिकल कॉलेज अस्पताल को प्लाज्मा देने की अनुमति दी गयी है।